बच्चों की पढ़ाई ठप, दूध सप्लाई और आवाजाही पर असर
बाकी मोंगरा(विनोद साहू की रिपोर्ट)-: खोलार नदी पर बना पुल ग्रामीणों की लापरवाही और घटिया निर्माण की भेंट चढ़ गया। 2008 में तैयार हुआ यह नया पुल बीच से टूट चुका है। इसी के बाजू में बना पुराना छोटा पुल भी बीच से क्षतिग्रस्त हो गया। दोनों ही पुल टूट जाने से देवरी, बुंदेली ,कसाईपाली और चाकाबुड़ा पंचायतों के हजारों लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है।
देवरी पंचायत के सरपंच शिवलाल कंवर, बुंदेली कसाईपाली के ललितेश प्रताप सिंह और चाकाबुड़ा की सरपंच उमा देवी रामकुमार गोटिया ने मिलकर अस्थायी इंतजाम किया। उन्होंने पुल पर बोल्डर और मुरूम डालकर पैदल और दोपहिया वाहनों का आवागमन शुरू कराया है। हालांकि यह व्यवस्था असुरक्षित और अस्थायी है।
दूध सप्लाई पर असर
बुंदेली कसाईपाली और चाकाबुड़ा क्षेत्र से रोजाना हजारों लीटर दूध बाकी मोंगरा कॉलोनी और होटलों तक सप्लाई होता है। पुल टूटने से दूधवाहकों को 5-6 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं।
बच्चों की पढ़ाई ठप
देवरी पंचायत में हाई स्कूल, मिडिल और प्राइमरी स्कूल संचालित हैं। चाकाबुड़ा, बुंदेली कसाईपाली, जोधरीबाड़ी, जावली, सालियाहपारा और दुलीकछार जैसे गांवों के बच्चे यहाँ पढ़ने आते हैं। पुल टूटने के बाद छोटे बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे हैं, जबकि बड़े बच्चे लंबा रास्ता तय कर पहुँच रहे हैं। स्थिति यह है कि स्कूल बस सेवा भी बंद हो गई है।
रोजाना 5-6 किलोमीटर घूमना पड़ता है
चाकाबुड़ा के छात्र भानु प्रताप ने बताया— “जब से पुल बह गया है, तब से हमें 10-15 बच्चों को कसाईपाली-खुदाई मार्ग से होकर आना पड़ता है। रोजाना करीब 5-6 किलोमीटर ज्यादा घूमकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।

घटिया गुणवत्ता की शिकायत पहले भी हुई थी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण में घटिया गुणवत्ता का काम हुआ था। उस समय के जनपद सदस्य रूप सिंह ने इसकी शिकायत कलेक्टर तक की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। आज उसकी हकीकत सामने है।

प्रशासन नदारद
ग्रामीणों का कहना है कि पुल टूटने के बावजूद अब तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचे हैं। उनका कहना है कि अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बच्चों की पढ़ाई, दूध सप्लाई और ग्रामीणों की जिंदगी लंबे समय तक प्रभावित रहेगी।
2008 में बना था पुल – 16 साल भी नहीं टिक पाया।
ग्रामीणों का आरोप – घटिया गुणवत्ता का काम, पहले भी शिकायत हुई थी।
अस्थायी व्यवस्था – पंचायतों ने बोल्डर-मुरूम डालकर चालू किया रास्ता।
सबसे ज्यादा असर – स्कूल के बच्चों और दूध सप्लाई पर पड़ा।
प्रशासन की चुप्पी – अब तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा।


