कुसमुहाई,

शिप्रा सस्टेनेबल एनवायरनमेंट फाउंडेशन, शहडोल द्वारा कुसमुहाई क्षेत्र में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी महिला किसानों को सशक्त बनाने एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 35 आदिवासी महिला किसानों को 200 से अधिक प्रकार के जैविक बीजों का वितरण किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना एवं उन्हें पारंपरिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों के प्रति प्रोत्साहित करना था। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को जैविक खेती, बीज संरक्षण, एवं पोषण वाटिका की स्थापना के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपसरपंच श्री अमर सिंह उपस्थित रहे। साथ ही कुसमुहाई ग्राम पंचायत के पंचगणों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम की सराहना की।
कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में रंजीता सोनी ने महिलाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया एवं जैविक खेती की तकनीकों को सरल भाषा में समझाया।
शिप्रा सस्टेनेबल एनवायरनमेंट फाउंडेशन के प्रतिनिधि डॉ. मेहुल चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि “जैविक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण एवं आर्थिक सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। आदिवासी महिलाओं को इस दिशा में सशक्त बनाना हमारा प्रमुख उद्देश्य है।”
कार्यक्रम के अंत में सभी महिला किसानों ने जैविक खेती अपनाने एवं प्राप्त बीजों का उपयोग कर पोषण वाटिका विकसित करने का संकल्प लिया।
शिप्रा सस्टेनेबल एनवायरनमेंट फाउंडेशन द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।


