मैं लगभग कई सालों से देख रही हूं कई कवियों की लेखकों की रचनाएं भी प्रसारित होती रही हैं

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मैं लगभग कई सालों से देख रही हूं कई कवियों की लेखकों की रचनाएं भी प्रसारित होती रही हैं कई सोशल मीडिया पर रिल्स तथा वेब सीरीज के माध्यम से वह समस्या उजागर करती हुई नजर आती भी है इस विषय पर मैं लगातार कार्य भी कर रही हूं वह समस्या है आज की तारीख में वृद्ध माता-पिता या सास ससुर वर्तमान समय में बहुत अधिक प्रताड़ित पीड़ित हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए अब तक कोई समाधान नहीं निकला पर हर्ष और गर्व इस बात की है कि वर्तमान समय में इस मामले में तेलंगाना सरकार ने कोई कानून बनाने की तैयारी की है जिसके अनुसार वृद्ध माता-पिता के लिए 10% वेतन कटौती करके दिया जा सकता है।इस कानून की प्रशंसा कई कवियों ने लेखकों ने स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे समाज सेवियों ने और स्वतंत्र अभिव्यक्ति से सेवा सहयोग का कार्य करने वाले भावना प्रधान व्यक्तियों ने भी की है। देश भर के अन्य अनेक लेखकों द्वारा भी वृद्धो के समर्थन में आवाज उठाई जाती रही है । मैं इस आवाज के विरुद्ध नहीं हूं लेकिन मैं इस आवाज के खिलाफ में बेबस जरूर हूं कि युवा शक्तिकरण होना चाहिए, ऐसी पुरजोर दमदार आवाज़ उठ रही हैं। युवा सशक्तिकरण महिला और पुरुष यह दोनों ही वर्ग इसमें आ रहे हैं युवा सशक्तिकरण का नारा लगाना कितना सही है और वृद्धो पर अत्याचार कितना सही है इन दोनों बातों में विरोधाभास है और यह विरोधाभासी बयान आमतौर पर दिए जाते हैं । कहीं नारा लगाता है युवा महिलाओं को कराटे सीखना चाहिए, कहीं नारा लगाता है मैं महिला हूं लड़ सकती हूं, कहीं नारा लगता है की युवा महिलाएं और वृद्ध पुरुषों के साथ अत्याचार हो रहे हैं , इस पर कानून बनना चाहिए व्यवस्था होनी चाहिए सभी अपने-अपने तरीके से समाधान दे रहे हैं
समझ में नहीं आता कि यह दो तरह की उल्टी सीधी बातें समाज में क्यों उठाई जाती हैं। मेरी समझ में यह युवा सशक्तिकरण या वृद्धो के साथ अत्याचार यह दोनों प्रकार के नारे पूरी तरह गलत है क्योंकि ऐसे में नकारात्मक वृत्ति का प्रचार हो रहा है सकारात्मक समाधान दबकर रह जा रहा है।इस मामले में क्या सरकार को कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए चाहे कोई युवा हो या वृद्ध हो महिला हो या पुरुष हो , आर्थिक सामाजिक शारीरिक तथा मानसिक रूप से ग्रस्त इन लोगों के लिए एक अलग अधिकार होना चाहिए , सरकार के हाथ में पावर है नियम है कानून है सरकार ऐसा कर सकती है कि सरकार यह घोषणा कर दे की जो व्यक्ति परिवार में संकट में होगा वह परिवार छोड़कर सरकार के आश्रित हो जाए हम उसके भरण पोषण की व्यवस्था करेंगे चाहे वह महिला हो या पुरुष युवा हो या वृद्ध हो या किसी भी जाति की यह किसी भी धर्म से संबंधित कोई भी क्यों ना हो। मेरा आपसे पुनः निवेदन है कि यह युवा और वृद्ध के बीच में टकराव पैदा करने के प्रयास घातक होता हुआ समाज अपंग और वृद्ध नपुंसक नजर आ रहा है। समस्याएं अनंत काल से हैं और अनंत काल तक चलती रहेगी पर समाधान क्या है इसका समाधान क्या हो सकता है क्या ऐसे समाधान पर सरकार को या प्रशासन को य बड़ी पूंजीपतियों की संरक्षण में चल रही समाज सेवी संस्थाओ को आगे आना नहीं चाहिए? यह सबसे बड़ा सवाल है। धनोपाजर्न की बहाली ऐसे विषयों के आड़े तेजी से हो रहा है
आप सभी जनमानस से मेरा यह अनुरोध है अगर मेरे विचारों में विरोधाभास हो तो मुझे मार्गदर्शन दें और अगर सहमति हो तो मेरा साथ दें
आपका साथ हमारा प्रयास
मैं कुछ नहीं हम बहुत कुछ है।

अधिवक्ता विजय लक्ष्मी पांडेय
प्रेरक वक्ता
मुख्य प्रबंधन निर्देशिका
सामाजिक स्वतंत्र संस्था
जाग मानव जाग परिवार
Mb no 9563130497
दिल्ली

आप सभी जनमानस से मेरा यह अनुरोध है अगर मेरे विचारों में विरोधाभास हो तो मुझे मार्गदर्शन दें और अगर सहमति हो तो मेरा साथ दें
आपका साथ हमारा प्रयास
मैं कुछ नहीं हम बहुत कुछ है

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