*राज्य स्तर पर बड़ी पहल: अनूपपुर के वन प्रशिक्षण संस्थान को “रेंजर ट्रेनिंग सेंटर” बनाने की माँग ने पकड़ी रफ्तार*

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*राज्य स्तर पर बड़ी पहल: अनूपपुर के वन प्रशिक्षण संस्थान को “रेंजर ट्रेनिंग सेंटर” बनाने की माँग ने पकड़ी रफ्तार*

अनूपपुर/भोपाल।
जनहित के एक दूरदर्शी प्रस्ताव ने अब राज्य स्तर पर औपचारिक संज्ञान ले लिया है। अनूपपुर जिले के अमरकंटक स्थित वन विद्यालय, जहाँ वनपाल एवं फॉरेस्ट गार्ड को प्रशिक्षण दिया जाता है, उसका दर्जा बढ़ाकर रेंजर प्रशिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करने की माँग को केंद्रीय स्तर से आगे बढ़ाया गया है।

*माननीय रामदास आठवले साहेब (राज्य मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, भारत सरकार* ) ने अनूपपुर निवासी *समाजसेवी श्री बबलू राठौर जी* के निवेदन पर विषय की गंभीरता स्वीकार करते हुए प्रकरण को *मध्यप्रदेश शासन के वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री दिलीप अहिरवार जी* को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित कर दिया है।

यह पत्राचार न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि यह संकेत है कि अनूपपुर का वन प्रशिक्षण ढांचा अब राज्य के मानचित्र पर नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है।

*क्यों ऐतिहासिक है यह प्रस्ताव?*

अमरकंटक क्षेत्र जैव-विविधता और वन संपदा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वर्तमान में यहाँ वनपाल/फॉरेस्ट गार्ड प्रशिक्षण होता है, पर रेंजर स्तर का संस्थान बनने से:

उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण संभव होगा

स्थानीय युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे

क्षेत्रीय प्रशासनिक क्षमता सुदृढ़ होगी

अनूपपुर को राज्य स्तरीय शैक्षणिक पहचान मिलेगी

*राज्य सरकार की ओर टिकी निगाहें*

अब यह प्रकरण मध्यप्रदेश शासन के वन एवं पर्यावरण विभाग के पास है। यदि शासन स्तर पर सकारात्मक निर्णय होता है, तो यह कदम न केवल अनूपपुर बल्कि पूरे विंध्य अंचल के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।

*जनसहभागिता से बनी पहल*

*समाजसेवी श्री राठौर* द्वारा तथ्यात्मक प्रस्तुति और निरंतर अनुश्रवण (Follow-up) ने यह साबित किया है कि संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाई गई आवाज़, सत्ता के सर्वोच्च स्तर तक पहुँच सकती है।

यह पहल दर्शाती है कि जब जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर विकास का खाका तैयार करते हैं, तो परिवर्तन की राह खुलती है।

*“अनूपपुर मॉडल” की ओर एक कदम*

यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो अमरकंटक वन विद्यालय का उन्नयन राज्य में वन प्रशासन के प्रशिक्षण मानकों को नई दिशा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और वन प्रबंधन की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करेगा।

अब सबकी निगाहें राज्य शासन के निर्णय पर हैं।

क्या अमरकंटक जल्द ही मध्यप्रदेश का नया रेंजर ट्रेनिंग हब बनेगा?

समय इसका उत्तर देगा, लेकिन यह तय है —

*जनहित की पहल ने इतिहास की ओर एक मजबूत दस्तक दे दी है।*

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