14 साल से वंचित! मोजर बेयर पावर प्रोजेक्ट से प्रभावित 75% परिवार अब भी पुनर्वास से वंचित, स्थायी पुनर्वास समिति गठन की उठी मांग

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 अनूपपुर ज़िले के जैतहरी स्थित मोजर बेयर पावर लिमिटेड (लहरपुर परियोजना) से विस्थापित और प्रभावित परिवारों की हालत आज भी बदहाल है। परियोजना स्थापित हुए लगभग 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी करीब 75% प्रभावित परिवारों को समुचित पुनर्वास का लाभ नहीं मिल पाया है।

पीड़ित परिवारों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि कंपनी और प्रशासन की लापरवाही के चलते सिर्फ 25% परिवारों को आंशिक लाभ दिया गया है, वह भी अधूरी और असमान प्रक्रिया के माध्यम से।

✦ प्रभावित परिवारों की मुख्य समस्याएँ

1. नौकरी और रोजगार का अभाव – कंपनी और प्रशासन की वादाखिलाफी से युवाओं को नौकरी/स्थायी रोजगार नहीं मिला।

2. पुनर्वास अधूरा – विस्थापित परिवारों को न तो सभी को नौकरी मिला, न ही आजीविका के साधन।

3. भूमि और अधिकार से वंचित – परियोजना के लिए ज़मीन देने वालों को पुनर्वास नीति का लाभ नहीं मिला।

4. नीतियों का उल्लंघन – मध्यप्रदेश सरकार की पुनर्वास नीति 2002, 2010, 2013 और राष्ट्रीय पुनर्वास नीति 2007, अनुबंध समझौता दिनांक 04 जून 2008, 22 सितंबर 2009, 29 दिसंबर 2012 का अब तक सही क्रियान्वयन नहीं हुआ।

 

✦ मोजर बेयर पावर कंपनी से प्रभावित परिवार के पुनर्वास हेतु स्थायी पुनर्वास समिति की माँग

प्रभावित परिवारों ने अनुविभागीय अधिकारी महोदय जैतहरी और राज्य सरकार से स्पष्ट माँग की है कि –

एक स्वतंत्र और निष्पक्ष स्थायी “पुनर्वास समिति” का गठन किया जाए, जिसमें न केवल प्रशासनिक अधिकारी बल्कि प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधि, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हों।

समिति द्वारा सभी प्रभावित व्यक्तियों की सूची का सत्यापन किया जाए और पुनर्वास की स्थिति की वास्तविक समीक्षा हो।

सरकार द्वारा पहले जारी आदेशों और पुनर्वास नीतियों का सख्ती से पालन कराया जाए।

 

✦ आवाज़ें हो रही तेज़

*प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधि किसान बबलू राठौर, मनोज राठौर (उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत जैतहरी), महेश प्रजापति (प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष, प्रेस फाउंडेशन ऑफ इंडिया मध्य प्रदेश), रविन्द्र राठौर(रवि) उपाध्यक्ष नगर परिषद जैतहरी और दशरथ प्रसाद, द्रोपति, रमेश, रामप्रसाद, रामबहादुर* सहित अन्य ने पत्र के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी महोदय जैतहरी, जिला प्रशासन, संभागायुक्त, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पुनर्वास समिति का गठन और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन एवं न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

✦ राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा

यह मामला केवल अनूपपुर जिले का नहीं है। देशभर में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं से विस्थापित परिवारों की दशा को दर्शाता है।
केंद्र और राज्य सरकार को इस मुद्दे को प्राथमिकता से लेना होगा, ताकि विस्थापित परिवारों को न्याय मिले और पुनर्वास नीति का सही पालन सुनिश्चित हो।

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