
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मोजर बेयर पावर लिमिटेड, लहरपुर (जैतहरी परियोजना) के चलते अपनी ज़मीन, घर और आजीविका से वंचित हुए लगभग हजारों परिवार आज भी अपने वैधानिक अधिकारों और पुनर्वास से वंचित हैं।
लगभग 14 वर्ष पहले स्थापित हुई इस परियोजना के कारण अनेक गाँवों के निवासियों को विस्थापित होना पड़ा, लेकिन आज तक केवल 25 प्रतिशत प्रभावित परिवारों को ही आंशिक लाभ मिल पाया है। वहीं, लगभग 75 प्रतिशत परिवार आज भी पुनर्वास और रोजगार के अधिकारों से वंचित हैं।
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✦ प्रभावित परिवारों का दर्द
परिवारों का आरोप है कि उन्हें उचित मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास योजना का लाभ नहीं दिया गया।
जिन कुछ परिवारों को लाभ मिला भी है, उन्हें यह लाभ अधूरे और असमान प्रक्रिया से दिया गया।
प्रभावित परिवारों ने कहा – “हमने अपनी ज़मीन और घर परियोजना के लिए छोड़ दिए, लेकिन बदले में न रोजगार मिला और न ही पुनर्वास का लाभ। यह हमारे साथ अन्याय है।”
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✦ मुख्य माँगें
प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और राज्य सरकार से निम्नलिखित माँगें की हैं –
1. स्थायी पुनर्वास समिति का गठन – एक स्वतंत्र और निष्पक्ष समिति बनाई जाए, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हों।
2. प्रभावित परिवारों की सूची का सत्यापन – वास्तविक प्रभावित परिवारों की पहचान की जाए और उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए।
3. रोजगार और आजीविका की गारंटी – विस्थापित परिवारों के योग्य सदस्यों को कंपनी में रोजगार दिया जाए और उन्हें मध्य प्रदेश राज्य की आदर्श पुनर्वास नीति 2002, राष्ट्रीय पुनर्वास नीति के अनुरूप सभी सुविधाएँ प्रदान की जाएं।
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✦ नीति का उल्लंघन
मध्य प्रदेश सरकार ने पुनर्वास नीति 2002, 2010 और 2014 तथा राष्ट्रीय पुनर्वास नीति 2008 के तहत स्पष्ट प्रावधान किए हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि कंपनी और स्थानीय प्रशासन ने इनका पालन नहीं किया।
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✦ प्रशासन और सरकार पर दबाव
*सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों किसान बबलू राठौर, मनोज राठौर उपाध्यक्ष जनपद पंचायत जैतहरी, महेश प्रजापति प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष प्रेस फाउंडेशन ऑफ इंडिया, रविन्द्र राठौर(रवि) उपाध्यक्ष नगर परिषद जैतहरी, दशरथ प्रसाद एवं अन्य* सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थायी पुनर्वास समिति का गठन शीघ्र नहीं किया गया तो यह मामला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन और न्यायालय तक ले जाया जाएगा।
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✍️ निष्कर्ष
यह मामला केवल अनूपपुर का नहीं, बल्कि देशभर में चल रही परियोजनाओं से प्रभावित लाखों परिवारों का है। यदि मोजर बेयर पावर लिमिटेड जैसी कंपनियों को बिना जवाबदेही के छोड़ दिया गया तो यह विस्थापितों के लिए न्याय की हत्या होगी।
अब समय आ गया है कि राज्य और केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर स्थायी पुनर्वास समिति का गठन करें और प्रभावित परिवारों को उनका हक़ दिलाएँ।


