एक तरफ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव @DrMohanYadav51 मंचों से बड़े गर्व के साथ यह घोषणा करते हैं कि ओबीसी को 27% आरक्षण “डंके की चोट पर” दिलवाया जाएगा, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। अदालत में सरकार के वकील तुषार मेहता हर बार सिर्फ़ एक ही बात कहते हैं — “अगली तारीख दे दीजिए।”
2019 से लेकर 2025 तक यही सिलसिला चल रहा है — तारीख पर तारीख, वादा पर वादा, और न्याय अब तक अधूरा!
यह स्पष्ट हो चुका है कि बीजेपी सरकार ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को केवल चुनावी मंचों तक सीमित रखती है, ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जबकि लाखों ओबीसी छात्र, युवा और कर्मचारी अपने हक़ के इंतज़ार में ठगे जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश की यह कहानी बिहार वालों के लिए चेतावनी है। वोट देने से पहले यह सोचें कि जिनके राज में ओबीसी को सिर्फ़ तारीखें मिलीं, वो बिहार में आकर आपका भला क्या करेंगे?
ओबीसी का हक़ भाषणों से नहीं, ठोस कार्रवाई से मिलेगा — और अब जनता सब समझ चुकी है।


