जनवरी में खूब हैप्पी न्यू ईयर हुआ
अब चैत्र के महीने को भी हैप्पी न्यू ईयर या हिंदी खंड काल के नव वर्ष की हार्दिक बधाई मंगल बोलने वाले हैं या कितने हैं
भई हमारे पूर्वज पूरनीया बुजुर्ग वो चाहे किसी भी जाति धर्म के हो सभी लोग चैत्र वैशाख जेठ आषाढ़ ही जानते थे, और आज भी वही जानते समझते हैं और सूरज और चंद्रमा की दिशा,उन्हें अंग्रेजी कैलेंडर नहीं आता समझ में,और आज ऐसा हैं की अंग्रेजी के आदी हो गए हैं,अंग्रेजी तो बाद में चलन में आया
पाश्चात्य संस्कृति का चश्मा ऐसा चढ़ा की अपनी संस्कृति भूल गए साहब, नए विचार और पुराने विचारों का सामंजस्य यानी संगम या बैलेंस बन ही नहीं पा रहा है तभी तो कलह वाद विवाद, जैसी कई असामाजिक मतभेद,मनभेद, पारिवारिक, सांस्कृतिक,राजनीति,अपराधिक वृत्तियों ने कलयुग में डेरा जमा लिया है, और हम कहते हैं राम राज्य, सतयुग, द्वापर, त्रेता,अरे भाई वह युग पार हो गए हैं अब कलयुग चल रहा है इस युग की जो डिमांड है लोग उसी में खुश हैं हर युग के बाद एक दूसरे युग की शुरुआत हुई है बीता हुआ युग कभी वापस नहीं आया तो कलयुग के बाद भी किसी दूसरे युग की शुरुआत हो सकती है पर कलयुग में पहले वाला युग वापस नहीं आ सकता है।
क्या कलयुग में सतयुग द्वापर त्रेता जैसा युग वापस आ सकता है या फिर कलयुग में कोई दूसरा युग आ सकता है या फिर कलयुग के बाद कौन सा युग आएगा, जो मुझसे मनभेद रखते हो या मतभेद रखते हो या हमे कोई युक्ति सुझा सकते हितेषी परिचित अपरिचित आप सभी से जवाब की अपेक्षा रहेगी
और दूसरा प्रश्न की क्या सतयुग में उसके पहले वाले युग आया था क्या द्वापर में सतयुग आया था क्या त्रेता में द्वापर आया था यह द्वापर में त्रेता आया था या फिर इन हर युग के पार होने के बाद एक नए युग की शुरुआत हुई थी ना मै थी ना मेरे बुजुर्ग थे जो उस युग में होंगे वह जवाब जरूर दे सकते हैं अगर जीवित है तो या उनके वंशज होंगे, शास्त्र संविधान कहानी कविता उपन्यास साहित्य चल चरित्र रेखा चित्र सब कुछ देख सुन पढ़ लिया जवाब नहीं मिला
एड विजय लक्ष्मी पांडेय
CMD JMJP


