
प्रधान संरक्षक वेदलक्षणा गोमाता एवं अध्यक्ष नंदी बाबा (वृषभ) की प्रेरणा से संचालित
गो सम्मान आह्वान अभियान
समस्त गोभक्त, संत समाज एवं भारत के सजग नागरिक)
दिनांक: 27 अप्रैल 2026
क्रमांक- गो.स.आ.अभियान /2026/GM/GR/140251/1072
महामहिम राज्यपाल महोदय, छत्तीसगढ़ सरकार, राजभवन, रायपुर।
द्वारा उचित माध्यमः
तहसीलदार / एस.डी.ओ. एस.डी.एम./ जिला कलेक्टर महोदय,विषयः छत्तीसगढ़ राज्य में ‘गोवंश’ के संरक्षण, संवर्धन एवं वध पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु कठोर कानून निर्माण पत्र।
माननीय महामहिम महोदय,
प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख के रूप में आपका गरिमामयी और ओजस्वी व्यक्तित्व हम सभी के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। आपकी न्यायप्रियता, विशाल प्रशासनिक अनुभव और जन-कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक के मन में एक नवीन विश्वास का संचार किया है। एवं प्रेस वार्ता में सामाजिक कार्यकर्ता लालू गबेल जी ने गौ रक्षा के लिए बहुत ही अच्छे जानकारी दिया गया और गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए सरकार से अपील किया एवं महिला कार्यकर्ता राम बाई सिदार ने भी बहुत ही सुंदर गौ माता की रक्षा करने के लिए गौ सेवा करते हुए गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए सरकार से अपील किया एवं सभी ने गौ माता राष्ट्र माता घोषित करने के लिए धूमधाम से रैली निकालते हुए जयकारा करते हुए तहसीलदार को ज्ञापन सोपा गया प्रभु श्री राम के ननिहाल और माता कौशल्या की इस पावन धरा तथा यहाँ की अनूठी सांस्कृतिक विरासत के प्रति आपका अगाध प्रेम जगजाहिर है, जो हमें पूर्णतः आश्वस्त करता है कि आपके संरक्षण में ‘छत्तीसगढ़िया अस्मिता’ और यहाँ की गौरवशाली परंपराएं सदैव अक्षुण्ण रहेंगी।
सविनय निवेदन है कि इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से हम आपका ध्यान राज्य की आत्मा और हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मूल आधार ‘गोवंश’ की वर्तमान स्थिति की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं। छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराओं का अनवरत प्रवाह और हमारी सांस्कृतिक विरासत का सम्पोषण सदैव प्रकृति और गोवंश के सानिध्य में ही फलीभूत हुआ है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और यहाँ के ग्रामीण जनजीवन की कल्पना गो-माता के सम्मान, सेवा एवं सुरक्षा के बिना अधूरी है।
वर्तमान संकट और चिंताजनक तथ्यः विदित हो कि स्वतंत्रता के समय प्रति व्यक्ति 10 गोवंश की उपलब्धता थी, वह आज निरंतर घटकर प्रति 10 व्यक्ति 1 गोवंश के चिंताजनक स्तर तक पहुँच गई है। आज हमारा देशी गोवंश विलुप्ति की कगार पर है, जिसके परिणामस्वरूप न केवल हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था बल्कि भारत की मूल लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक जड़ें भी कमजोर हो रही हैं। वर्तमान में गो-तस्करी, बूचड़खानों में निर्मम वध, सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाओं और नगरीय क्षेत्रों में पॉलिथीन भक्षण के कारण प्रतिदिन लाखों गोवंश काल का ग्रास बन रहा है।
श्रीमान गोवंश की वर्तमान पीड़ादायक स्थिति को देखते हुए समाधान हेतु निम्नलिखित आग्रह प्रेषित हैं:-
1. एकीकृत केंद्रीय कानून एवं स्वतंत्र मंत्रालयः छत्तीसगढ़ में गोवंश के संरक्षण हेतु राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 48 में आवश्यक संशोधन कर ‘केन्द्रीय गो सेवा एवं संरक्षण अधिनियम लागू करने तथा पृथक
