शुभ संकेत/ बांकीमोंगरा:-।नगर के सबसे व्यस्त चौपाटी क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से धड़ल्ले से व्यावसायिक कारोबार किया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि नगर प्रशासन, खाद्य विभाग और आपूर्ति विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?भीड़ के बीच जलता खतरा जहां रोज़ सैकड़ों लोग, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहते हैं, वहीं ठेले-खोमचों में घरेलू गैस सिलेंडरों पर खाना पकाया जा रहा है। कई जगह अस्थायी चूल्हे खुले गैस पाइपबिना रेगुलेटर और सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह हालात किसी भी वक्त आगजनी या विस्फोट को न्योता दे सकते हैं।नियम किताबों में, ज़मीन पर शून्य कार्रवाई एलपीजी नियमों के अनुसार घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग अपराध की श्रेणी में आता है, इसके बावजूद चौपाटी क्षेत्र में यह खेल खुलेआम जारी है। सवाल उठता है कि नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? और अगर जिम्मेदार विभाग जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे, तो यह लापरवाही है या मिलीभगत? सरकारी राजस्व पर डाका घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में भारी अंतर है। घरेलू गैस का व्यवसाय में उपयोग सीधे तौर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके बावजूद न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही जब्ती की कार्रवाई। स्थानीय लोगों में आक्रोश स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि प्रशासन की इस चुप्पी से डर और गुस्सा दोनों बढ़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अब भी नहीं जागा प्रशासन तो जिम्मेदार कौन? नगरवासियों ने मांग की है कि नगर प्रशासन खाद्य विभाग आपूर्ति विभाग संयुक्त रूप से तत्काल विशेष अभियान चलाए, अवैध सिलेंडरों को जब्त करे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे। वरना सवाल यही रहेगा—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
चौपाटी ‘गैस बम’ बनी, प्रशासन बेखबर! घरेलू सिलेंडरों से खुलेआम कारोबार, हादसे का इंतज़ार क्यों?
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