विद्युत संविदा कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, 22 जून से अनिश्चितकालीन ‘काम बंद’ आंदोलन का ऐलान
कोरबा (विनोद साहू की रिपोर्ट)-: छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने छ.ग. स्टेट पावर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने प्रबंधन द्वारा जारी नई ‘लाइन परिचारक (संविदा) मानव संसाधन नीति-2025’ को कर्मचारी विरोधी और जानलेवा बताते हुए इसके विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी माँगें पूरी नहीं हुईं, तो 22 जून 2026 से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन किया जाएगा।
नियमितीकरण की राह में रोड़ा है नई नीति:
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, नई नीति में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और रिक्त पदों पर समायोजन के प्रावधानों को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। 10 साल की सेवा के बाद भी कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय केवल संविदा के रूप में शोषित करने की योजना बनाई गई है।
जोखिम भरे कार्य और सुरक्षा पर सवाल:
संघ का आरोप है कि प्रबंधन नई नीति के माध्यम से संविदा कर्मचारियों पर जबरन लाइन परमिट लेकर कार्य करने का दबाव बना रहा है। बिना किसी सुरक्षा गारंटी और अनुभव के अभाव में परमिट लेकर काम करना कर्मचारियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि कार्य के दौरान कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
आंदोलन की रूपरेखा:
अपनी एक सूत्रीय माँग (नियमितीकरण) को लेकर संघ निम्नलिखित चरणों में आंदोलन करेगा:
1. 25 मई 2026: -विद्युत सेवा भवन, डंगनिया (रायपुर) मुख्यालय में एक दिवसीय ‘गेट मीटिंग’।
2. 22 जून 2026 से:– अनिश्चितकालीन प्रदेश व्यापी कामबंद आंदोलन।
संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने कहा कि हमने बार-बार द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन प्रबंधन के तानाशाही रवैये के कारण हमें आंदोलन के लिए विवश होना पड़ा है। शासन-प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई है और भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति के लिए पावर कंपनी प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
यहां उल्लेखनीय है कि विद्युत वितरण कंपनी में 5000 से अधिक पद रिक्त हैं साथ पारेषण कंपनी में में भी काफी पद रिक्त हैं। इसके बावजूद प्रदेश भर में पावर कंपनी के अंतर्गत कार्यरत 2500 संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय कंपनी शोषण की नीति अपनाते हुए सिर्फ आउटसोर्स को बढ़ावा देते जा रही है। जबकि लाइन का दाब अत्यंत ही तीव्र गति से बढ़ते जा रहा है। कंपनी में नियमित कर्मचारियों की भारी कमी है जिससे मैदानी मोहन में सुधार कार्य समय पर संपादित नहीं हो पा रहे हैं। वर्तमान सरकार को पावर कंपनी प्रबंधन की दुर्दशा की स्थिति में पूर्ण रूप से जानकारी है किंतु फिर भी सरकार इसमें पावर कंपनी प्रबंधन को दिशा निर्देश नहीं दे रही है संविदा कर्मचारियों को नियमित कर नहीं नियमित पदों पर भर्ती किया जाए।
वर्तमान में विद्युत वितरण और पारेषण कंपनियों में कर्मचारियों की भारी कमी है। नियमित अमला कम होने के कारण मैदानी स्तर पर सुधार कार्य पहले से ही प्रभावित हो रहे हैं। संविदा कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से भीषण गर्मी के इस मौसम में प्रदेश की जनता को भारी कटौती और फाल्ट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
संविदा संघ के अध्यक्ष हरिचरण साहू जी का कहना है कि सरकार को स्थिति की पूरी जानकारी है, फिर भी प्रबंधन को उचित दिशा-निर्देश नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आगामी दिनों में कंपनी प्रबंधन संविदा कर्मियों की न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लेता है, तो बाध्य होकर संविदा कर्मचारियों को वर्ष 2021-22 की भांति सरकार के विरुद्ध व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
संघ ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले में हस्तक्षेप कर कंपनी प्रबंधन को निर्देशित किया जाए, ताकि संविदा कर्मियों को उनके अधिकार मिल सकें और औद्योगिक शांति बनी रहे।


