दिलली संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से सदिच्छा भेंट की और तीसरी बार राज्यसभा सदस्य व केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवा का अवसर देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। देश की आंबेडकरी जनता और बहुजन समाज में इस नियुक्ति से भारी उत्साह है। प्रधानमंत्री जी ने मुझे बड़े प्रेम से कहा कि ‘आठवले जी, अब आप 6 साल राज्यसभा में रहिए, आपको कोई अड़चन नहीं आएगी।’ उनकी इस आत्मीयता ने मेरा दिल जीत लिया।
मुलाकात के दौरान मैंने दो महत्वपूर्ण विषय उनके सामने रखेः
बौद्ध जनगणनाः महाराष्ट्र के धर्मांतरित बौद्धों की जनगणना के लिए मैंने सुझाव दिया कि जाति के कॉलम में नाम के बजाय अनुसूचित जाति का अनुक्रमांक 59 लिखा जाना चाहिए, ताकि तकनीकी दिक्कतें दूर हों। स्कॉलरशिप में वृद्धिः दलित और आदिवासी छात्रों की स्कॉलरशिप राशि पिछले 15 वर्षों से नहीं बढ़ी है। केंद्र का हिस्सा अब 60% है, इसलिए मैंने महंगाई के अनुसार इस राशि को बढ़ाने की मांग की है, जिस पर प्रधानमंत्री जी ने सकारात्मक आश्वासन दिया है।


