
शुभ संकेत/कोरबा;-गर्मी के दिनों में जंगलों में आग लगना आम बात है आग अपने आप तो लगती नहीं या तो लगाईं जाती है या फिर किसी की लापरवाही होती है । ऐसी ही एक घटना बांकीमोंगरा के रिजर्व फॉरेस्ट 790 में दिखाई दी यहां लगे बांस के जंगल में लगातार दो दिनों तक आग लगी या फिर लगाई गई । वहीं कटघोरा न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ता अमित सिन्हा ने मिडिया से चर्चा करते हुए बताया कि 16 अप्रैल 2024 को जब वह कटघोरा जा रहे थे तब उन्होंने जंगल में आग लगा देखा वही 18 अप्रैल को पुनः वें कटघोरा जाते हुए देखा कि बासबाड़ी के जंगलों में भीषण आग देखी जिसकी सुचना उन्होंने अधिकारियों को दी । अमित सिन्हा ने बताया कि 18 अप्रैल 2024 को उन्होंने दो लोगों को मुंह में कपड़ा बांधकर बांसबाड़ी में आग लगाते देखा आगे उन्होंने कहा कि वन विभाग के कर्मचारी आग बुझाने का काम करते हैं फिर यह कौन लोग हैं जो जंगल में आग लगा रहे हैं क्या वाकई में जंगल में आग लगाई गई है अगर लगाई गई है तो यह किसी बड़ी साज़िश कहीं जा सकती है । क्योंकि पहले लोग जंगल में आग लगाते हैं फिर उसी खाली पड़े जगह पर कब्जा कर लेते हैं, इसमें कहीं ना कहीं वन विभाग के कर्मचारियों की मिली भगत रहती है । आशंका तो यह भी है कि विभाग के कर्मचारी बांस के पौधे में इसलिए आग लगा देते हैं ताकि पौधे सूख जाए और उन्हें काटकर बेचा जा सके । अधिवक्ता अमित सिन्हा ने कहा कि पुलिस प्रशासन के साथ – साथ वन विभाग को भी चाहिए कि इस प्रकार की आगजनी की जांच की जाए और दोषी लोगों के ऊपर कार्यवाही करें और जंगलों में हो रहे बेजा कब्जे को रोका जा सके । सवाल यह भी उठ रहे हैं कि अगर जंगल में दो दिन आग लगा तो अग्निशमन वाहन क्यों नहीं आया या उसे आगजनी की सुचना नहीं दिया गया । सुने अधिवक्ता अमित सिन्हा ने मिडिया से क्या कहा ।


