सक्ती।
गुरु पर्व के पावन अवसर पर 01 दिसंबर से प्रारंभ हुई ऐतिहासिक “सतनामी स्वाभिमान जगाओ साइकिल यात्रा” सतनाम आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान कर रही है। इस जनजागरण यात्रा का शुभारंभ ग्राम भनेतरा हसौद, जिला सक्ती (छत्तीसगढ़) से संघर्षशील परिवर्तनवादी पितांबर बंजारे ने किया है।
बीते 23 दिनों में यह साइकिल यात्रा अब तक 208 गांवों तक पहुंच चुकी है। यात्रा हसौद, जैजैपुर, बाराद्वार, सक्ती होते हुए वर्तमान में मालखरौदा परिक्षेत्र के ग्राम आमनदुला एवं सेंदुरस पहुंची, जहां ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यहां से यात्रा का अगला चरण सेंदुरस, सारसडोल , सतगढ़ होते हुए पिहरिद तक रहेगा, जहां रात्रि विश्राम किया जाएगा।

अब तक यह यात्रा लगभग 490 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है। गांव-गांव में समाज के लोग बड़ी संख्या में आगे आकर सतनाम आंदोलन को मजबूती देने के लिए उत्साह और समर्थन व्यक्त कर रहे हैं। सतनामी समाज सहित सर्वसमाज के लोग इस आंदोलन को खुले दिल से स्वीकार कर रहे हैं।
पितांबर बंजारे ने संकल्प लिया है कि जब तक गुरु घासीदास जी के सतनाम आंदोलन को समाज में पुनः जीवित और सशक्त नहीं कर दिया जाता, तब तक यह यात्रा नहीं रुकेगी। वे “मानव-मानव एक समान” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर संघर्षरत हैं।
इस साइकिल यात्रा के माध्यम से जातिगत अन्याय, अत्याचार, भेदभाव, ऊंच-नीच और असमानता के खिलाफ समाज को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही यह संदेश दिया जा रहा है कि शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन और क्रांति का आधार है, जो मनुष्य को मनुष्य होने का अहसास कराती है तथा न्याय, स्वतंत्रता, समता और मानवतावादी विचारधारा को स्थापित करती है।
यात्रा का प्रभाव यह है कि समाज में चेतना का संचार हो रहा है। लोग अंधविश्वास, पाखंडवाद, कर्मकांड और आडंबर को त्याग कर तर्कशील, वैज्ञानिक और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
सतनाम आंदोलन की मूल पहचान “मानव-मानव एक समान” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसे यह साइकिल यात्रा गांव-गांव तक पहुंचाकर सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव रख रही है।


