ज़मीन ली… वादे कुचले… अब रोज़ी पर भी डाका! एम.बी. पावर प्रबंधन कटघरे में — 57 विस्थापितों का खुला शोषण, आज श्रमायुक्त के सामने पेशी

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अनूपपुर | 24 दिसंबर जिस ज़मीन पर एम.बी. पावर (म.प्र.) लिमिटेड ने करोड़ों की परियोजना खड़ी की —
आज उसी ज़मीन के असली मालिक अपनी ही रोज़ी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

भूमि अधिग्रहण के समय रोज़गार, सम्मान और न्याय के जो सपने दिखाए गए थे,
आज वही सपने प्रबंधन की मनमानी तले कुचले जा रहे हैं।

57 कर्मचारियों के साथ अन्याय — कानून को ठेंगा

एम.बी. पावर लहरपुर–जैतहरी प्रबंधन पर आरोप है कि उसने:

▪️ लगातार प्रभावित परिवार के सदस्यों के साथ शोषण व जुल्म किए है और अब तक भी कर रहे है
आई टी आई किए व 7 वर्षों से अधिक के एक्सपीरियंस रखे सदस्यों को सिक्यूरिटी गार्ड का कार्य कराते है जो अभी भी कार्य कराया जा रहा है।

❝ ज़मीन हमारी… पर हक़ नहीं हमारा? ❞

यह कोई गलती नहीं —
👉 यह सुनियोजित शोषण है।

अपनी ही लिखित शर्तों से पलटा प्रबंधन

भूमि लेते समय लिखित शर्तें तय की गईं,
लेकिन आज वही प्रबंधन नियम-कानून से ऊपर खुद को समझते हुए
प्रभावित परिवारों पर मनमाना व्यवहार कर रहा है।

सबसे चिंताजनक सवाल यह है कि —
❓ क्या कंपनी को कानून का डर नहीं?
❓ क्या विस्थापित होना ही सबसे बड़ा अपराध है?

रामकली प्रजापति की शिकायत ने खोली पोल

भूमि विस्थापित किसान परिवार की सदस्य
श्रीमती रामकली प्रजापति (पति स्व. देवलाल प्रजापति) द्वारा की गई शिकायत पर
सहायक श्रमायुक्त, शहडोल ने गंभीर संज्ञान लिया है।

👉 आज 24 दिसंबर 2025 को
एम.बी. पावर के संचालक/प्रबंधक को श्री मान सूर्यकांत सिरवैया जी
सहायक श्रमायुक्त महोदय के समक्ष कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

यह पहली बार है जब
👉 कंपनी प्रबंधन को अपने ही कृत्यों का जवाब देना पड़ेगा।

आज 57 लोग… कल 150… परसों पूरा इलाका?

शिकायत अभी 01 कर्मचारियों की है,
लेकिन शोषण 57 परिवारों का हुआ है।

आज यदि हम चुप रहे —

कल वेतन और कटेगा

परसों नौकरी भी छीनी जा सकती है

❗ चुप्पी अब अपराध बनती जा रही है।

यह केवल मजदूरी का मामला नहीं — यह आत्मसम्मान की लड़ाई है

यह लड़ाई:

ज़मीर की है

रोज़ी की है

अधिकार की है

और सबसे बढ़कर इंसाफ़ और मानसम्मान की है

यदि आज भी विस्थापित परिवार एकजुट नहीं हुए,
तो आने वाला कल और भी अंधकारमय होगा।

अब फैसला आपको करना है

❓ क्या हम सिर्फ ज़मीन देने वाले बनकर रह जाएंगे?
❓ या अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाएंगे?

इतिहास गवाह है —
जो चुप रहे, वे मिटा दिए गए।
जो बोले, वही बचे।

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