अगर मेरी माँ को कुछ हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अनूपपुर स्वास्थ्य विभाग की होगी” पत्रकार अजीत तिवारी का सीधा आरोप, CM हेल्पलाइन में शिकायत के बावजूद अब तक नहीं हुई कार्रवाई
अनूपपुर/विशेष रिपोर्ट
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में एक माँ जिंदगी की जंग लड़ रही है — और सिस्टम आँखें मूंदे बैठा है। पत्रकार अजीत तिवारी की माँ श्रीमती कुसुम तिवारी बीते कई दिनों से गंभीर हालत में हैं। हालत ऐसी है कि अब उन्हें देश के नंबर वन हेमेटोलॉजिस्ट डॉक्टर नवीन गुप्ता के पास जयपुर ले जाना पड़ रहा है।
लेकिन सवाल ये है कि आज माँ इस हालत में क्यों पहुंचीं? जवाब है — अनूपपुर जिला अस्पताल की लापरवाही और स्वास्थ्य विभाग की घोर उदासीनता।
**इलाज की बजाय खिलवाड़*
> प्लेटलेट 13,010 और हीमोग्लोबिन 4.0 — ये रिपोर्ट थी कुसुम तिवारी की।
डॉक्टर को तुरंत प्लेटलेट चढ़ाना था, रेफर करना था, विशेषज्ञ बुलाना था।
लेकिन डॉ. माझी ने तीन दिन तक सिर्फ सामान्य ब्लड चढ़ाया जिससे शरीर में भारी संक्रमण फैल गया।
**अब तक खर्च हो चुके हैं ₹6 लाख — प्राइवेट इलाज में*
अजीत तिवारी ने माँ को पहले जबलपुर और फिर नागपुर के प्राइवेट अस्पतालों में दिखाया।
दोनों जगह के डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा:
> “गलत इलाज और बार-बार ब्लड चढ़ाने से शरीर में गंभीर इन्फेक्शन हो गया है, स्थिति अब खतरनाक है।”
**अब 11 अगस्त को जयपुर की ट्रेन से रवाना*
अब अजीत तिवारी माँ को जयपुर ले जा रहे हैं — महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. नवीन गुप्ता से इलाज कराने।
यह अंतिम उम्मीद है, क्योंकि हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
*CM हेल्पलाइन में शिकायत लेकिन व्यवस्था अब तक सोई है**
अजीत तिवारी ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज की है शिकायत क्रमांक: 33707768 दोषी डॉक्टर और CMHO के खिलाफ कार्रवाई की माँग आर्थिक सहायता और जवाबदेही की मांग
लेकिन आज दिनांक तक
कोई डॉक्टर निलंबित नहीं
कोई अधिकारी जवाबदेह नहीं
कोई सहयोग राशि नहीं
न ही अजीत तिवारी से प्रशासन ने संवाद किया
**यह सिर्फ मेरी नहीं, अनूपपुर के हर गरीब की लड़ाई है अजीत तिवारी*
> “मैंने अपनी माँ के इलाज में ₹6 लाख झोंक दिए — अब जयपुर ले जा रहा हूँ। जबलपुर और नागपुर के डॉक्टरों ने बता दिया कि जिला अस्पताल की लापरवाही के कारण हालत बिगड़ी।
**अब सवाल है — क्या गरीब के पास इतना पैसा होता है? क्या हर माँ को मरने के बाद ही सिस्टम जागेगा?*
मैं सभी पत्रकार साथियों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों से अपील करता हूँ — इस आवाज़ को मत दबने दीजिए। यह आवाज़ सिर्फ मेरी नहीं, *आपकी है, आपके घर की है, आपके गाँव की है। मेरी माँ की साँसे अब भगवान और आप सब की दुआओं पर टिकी हैं”
> “मैं हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं — मेरी माँ के लिए दुआ करें।
आप सबका साथ ही मेरी माँ की सबसे बड़ी दवा है।”
**सवाल जो अब सबको पूछने चाहिए*
1. क्या गरीब की माँ की जान की कोई कीमत नहीं?
2. क्या सीएम हेल्पलाइन सिर्फ खानापूर्ति है?
3. कब तक डॉक्टर अपने निजी क्लीनिक में कमाई करते रहेंगे और सरकारी अस्पतालों में जान से खिलवाड़ करते रहेंगे?
4. CMHO किसके दबाव में चुप बैठे हैं?
**पत्रकारों से अपील: एकजुट हों, आवाज़ बनें*
> यह वक्त है — कलम को हथियार बनाने का।
यह वक्त है — माँ के आँसुओं को शब्दों में बदलने का।
यह वक्त है — भ्रष्ट चिकित्सा तंत्र को आईना दिखाने का।
आप सब साथ आइए — अजीत तिवारी की माँ के साथ खड़े हों।
आज उनके साथ जो हुआ है, कल किसी और के साथ न हो।
**यह खबर नहीं, चेतावनी है जागिए अनूपपुर! वरना आपकी बारी आने में देर नहीं लगेगी।*


