शुभ संकेत। यह खबर मोजर पावर प्लांट में हुए कॉर्पोरेट घूसकांड से संबंधित है, जिसमें मजदूर नेता जुगल किशोर राठौर ने प्लांट प्रबंधन पर सात लाख रुपये रिश्वत देने की कोशिश का खुलासा किया था.
मुख्य बातें
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घूसकांड का खुलासा: जुगल किशोर राठौर ने 9 मई को मोजर बेयर पावर प्लांट प्रबंधन द्वारा सात लाख रुपये की रिश्वत देने की कोशिश का खुलासा किया, जिससे प्रदेश भर में सुर्खियां बनीं.
प्रशासन की खामोशी: इस सनसनीखेज खुलासे के बावजूद, पुलिस और प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई.
न्याय की गुहार: महीनों तक थाना, एसडीओपी और आईजी शहडोल के पास भटकने के बाद भी जब राहत नहीं मिली, तो राठौर ने अब भोपाल पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है.
कानून पर सवाल: राठौर का कहना है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और संशोधित अधिनियम 2018 के तहत निजी क्षेत्र भी आता है, लेकिन कॉर्पोरेट घराने कानून से बच रहे हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या कानून सिर्फ कमजोरों को फंसाने का जाल है.
सिस्टम पर आरोप: खबर में यह भी कहा गया है कि यदि यही रिश्वतखोरी किसी आम आदमी से जुड़ी होती तो अब तक जेल हो चुकी होती, और यह चुप्पी कानून की कमजोरी और सिस्टम की मिलीभगत को उजागर करती है.


