
केंद्रीय मंत्री ने विधि एवं न्याय राज्य मंत्री को भेजा पत्र
नई दिल्ली/अनूपपुर। शुभ संकेत: आदिवासी बहुल एवं अत्यंत पिछड़े जिला अनूपपुर में श्रम न्यायालय स्थापित करने की मांग अब केंद्र स्तर तक पहुंच गई है।समाजसेवी बबलू राठौर द्वारा उठाई जा रही इस मांग को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री माननीय रामदास आठवले जी ने इस संबंध में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल जी को पत्र प्रेषित कर आवश्यक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि अनूपपुर जिले के श्रमिकों को वर्तमान में श्रम संबंधी मामलों के लिए शहडोल श्रम न्यायालय जाना पड़ता है, जिसकी दूरी लगभग 100 से 150 किलोमीटर है। इससे पक्षकारों को समय एवं धन की अनावश्यक हानि उठानी पड़ती है।
पत्र में यह भी बताया गया है कि अनूपपुर जिले में कोयला क्षेत्र की खदानें, औद्योगिक इकाइयां तथा विभिन्न पावर प्लांट संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में श्रम विवादों की संख्या भी अधिक है, जिससे स्थानीय स्तर पर श्रम न्यायालय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
समाजसेवी बबलू राठौर ने कहा है कि “श्रमिक वर्ग को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है। अनूपपुर जैसे दूरस्थ जिले में श्रम न्यायालय की स्थापना से हजारों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।”
केंद्रीय मंत्री द्वारा पत्र भेजे जाने के बाद यह विषय राज्य और केंद्र सरकार के प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अब संबंधित विभागों द्वारा प्रस्ताव पर विचार और आगे की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
यदि अनूपपुर में श्रम न्यायालय की स्थापना होती है, तो इससे क्षेत्र के श्रमिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय मिलने में सुविधा होगी।


