
कोरबा -: भारतीय मजदूर संघ की गेवरा इकाई ने आजाद चौराहे से इस मामले को लेकर रैली निकाली और प्रबंधन को ज्ञापन सौपने के साथ अल्टीमेटम दिया।
कोरबा में एक वर्ष में लगभग 65 मिलियन टन कोयला का उत्पादन करने वाले गेवरा क्षेत्र में प्रबंधन के द्वारा नियमित कर्मचारी की सुविधाओं में लगातार कटौती की जा रही है। एक प्रकार से कर्मचारियों को परेशान करने का प्रयास प्रबंधन कर रहा है। भारतीय मजदूर संघ की गेवरा इकाई ने आजाद चौराहे से इस मामले को लेकर रैली निकाली और प्रबंधन को ज्ञापन सौपने के साथ अल्टीमेटम दिया। संगठन ने कहा है कि अगर इस प्रकार की नीति को बंद नहीं किया गया तो आगे कठोर निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के कुल लक्ष्य की 60% से भी ज्यादा मात्र की पूर्ति कोरबा जिले की कोयला खदानों से हो रही है। कोरबा जिले में एसईसीएल के चार क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 20 खदानें चल रही हैं और इनके माध्यम से कंपनी को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ की कमाई हो रही है। मेगामाइंड्स का योगदान इस मामले में सबसे ज्यादा है। इतना सब कुछ होने पर भी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड से मैसेज गेवरा क्षेत्र के कर्मचारियों की सुविधाओं में लगातार कटौती करते हुए उन्हें परेशान करने में बड़ा हुआ है। भारतीय मजदूर संघ की गेवरा इकाई ने इसी मामले को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। गेवरा के आजाद चौराहा से होते हुए कार्यकर्ताओं ने सीजीएम कार्यालय टकरायली निकाल जहां पर क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक को ज्ञापन सोपा गया।
श्रमिक नेता एस के राठौर ने बताया कि एस राठौर ने बताया कि एसईसीएल की लचर व्यवस्था है केवल कर्मचारियों का शोषण कर रही है खाली वेतन दे रही है लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है नहीं कॉलोनी में साफ सफाई है समय पर पानी नहीं मिलता इसके अलावा मेडिकल भी केवल खानापूर्ति है ऐसे कई अन्य सुविधाएं जो मिलनी चाहिए वह नहीं मिल रही है। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि वेतन को छोड़कर दूसरी सुविधाओं के बारे में अधिकारियों का ध्यान अपने नियमित कर्मचारियों पर है ही नहीं। हमारे द्वारा ज्ञापन सपना के साथ आगे की रणनीति के बारे में सभी चीज स्पष्ट कर दी गई है।
भारतीय मजदूर संघ ने कर्मचारी हित को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है और प्रबंधन को अवगत करा दिया गया है कि अगर उसने अपना रवैया नहीं बदल दो आगे सहयोग शुरू कर दिया जाएगा ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले सभी हालात के लिए प्रबंधन के अधिकारी जिम्मेदार होंगे।


