छत्तीसगढ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया चैत्र माह में कैसा रहे खान-पान कैसी रहे दिनचर्या

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कोरबा/शुभ संकेत: हिंदी मासानुसार चैत्र माह का आरंभ 15 मार्च 2025 शनिवार से हो गया है, जो 12 अप्रैल 2025 शनिवार तक रहेगा। आयुर्वेद अनुसार प्रत्येक माह में विशेष तरह के खान-पान का वर्णन किया गया है, जिसे अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं। इसी विषय पर छत्तीसगढ़ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया की भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या यानी ऋतुनुसार आहार-विहार करने की परंपरा रही है, यह संस्कार हमें विरासत में मिला है।

अभी चैत्र माह का आरम्भ 15 मार्च 2025 शनिवार से हो गया है, जो 12 अप्रैल 2025 शनिवार तक रहेगा। इस अंतराल में हमें अपने आहार-विहार पर विशेष ध्यान देना चाहिये। चैत्र माह में मौसम में बदलाव होता है, वसंत ऋतु अपने चरम पर होती है। चैत्र माह में वसंत ऋतु का अंत और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत हो जाती है। इस दौरान तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, जिससे गर्मी का एहसास होने लगता है, जिससे वातावरण गर्म और शुष्क होने लगता है। चैत्र माह में ऋतु परिवर्तन का समय होने के कारण सर्दी, खांसी एवं ज्वर की संभावना भी बढ़ जाती है और कमजोर पाचन शक्ति के कारण अपच, उल्टी और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियाँ होने की संभावना भी अधिक रहती है। इसलिये विशेष रूप से हमें तैलीय, मसालेदार भारी भोजन, होटल के भोजन से परहेज करना चाहिये।

गर्मी बढ़ने के कारण डिहाइड्रेशन की संभावना बढ़ जाती है, इसलिये पानी का उचित मात्रा मे सेवन करना चाहिये। साथ ही चैत्र माह में वातावरण मे शुष्कता के कारण आँखों में सूखेपन की समस्या भी बढ़ जाती है। जिसके बचाव के लिये आँखों को समय-समय पर धोना चाहिये एवं चिकित्सक से परामर्श लेकर आंखों मे गुलाबजल डालना चाहिये। चैत्र माह में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिये साथ ही बासी भोजन से परहेज करना चाहिये। चैत्र माह में गुड़ का सेवन नहीं करना चाहिये। इसके सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। चैत्र माह में चने का सेवन करना स्वास्थ्य की दृष्टि से हितकर है।

आहार-
क्या खाना चाहिये- चना, अनाजों में जौ, ज्वार की खीर, चांवल, मक्के की खीर, छिलके वाली मूंग दाल, मौसमी फल जैसे- अमरूद, अनार, संतरा, सेव, अंगूर, नारियल आदि। सब्जियों में- सहजन की फली, हरा धनिया, अदरक, पुदीना, करेला, ककड़ी, लौकी आदि साथ ही मसालों में काली मिर्च, सूखा धनिया, मीठा नीम, अजवाईन, जीरा, मेथी, सौंफ आदि।

क्या नहीं खाना चाहिये- गुड़, अनाज में नया गेंहू, बाजरा, मक्का, उड़द दाल, कुलथी दाल, राजमा, सब्जियों में गाजर, मूली, मटर, फूल गोभी, पत्ता गोभी, बैंगन, मेथी, सरसों का साग, अरबी, फलों में आम, आम का रस, पपीता, केला, तथा ज्यादा तेल मिर्च मसाले वाले, देर से पचने वाले भारी भोजन एवं बासी भोजन का सेवन कम से कम ही करना चाहिए।

जीवनशैली-
क्या करें- रात्रि में जल्दी सोना एवं प्रात: जल्दी उठना चाहिये। सुपाच्य ताजा भोजन करें, पानी ज्यादा पियें। योग-प्राणायाम, ध्यान एवं यथाशक्ति शारीरिक व्यायाम करना चाहिये लेकिन अत्यधिक श्रम से बचें।

क्या न करें- प्रात:देर तक शयन करने से, मसालेदार, तैलीय,भारी भोजन करने से, यथाशक्ति श्रम और व्यायाम न करने से, तामसिक आहार के सेवन से, दिन मे शयन करने से, रात्रि जागरण करने से बचाव करना चाहिये।

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