छत्तीसगढ़:- बिलासपुर में आज सीपत रोड के साईस कॉलेज में क्यों था जश्न का माहौल आइए जाने….?

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बिलासपुर :– राज्य सरकार ने प्रदेश के जिन 10 कॉलेजों को अंग्रेजी माध्यम बनाने का फैसला लिया है, उसमें बिलासपुर का एकमात्र साइंस कॉलेज भी शामिल है। संभाग ही नहीं प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान बनाने वाले इस कॉलेज में एडमिशन के लिए मारामारी की स्थिति रहती है। ऐसे में एडमिशन होने के बाद इसे अंग्रेजी माध्यम बनाने का स्टूडेंट्स विरोध कर रहे थे, जिन्हें उच्च न्यायालय से राहत मिल गयी है।

महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं ने कहा कि साइंस कॉलेज स्कूल इंग्लिश मीडियम बनाने का वह लगातार विरोध कर रहे थे. इस मामले में छात्रों ने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल किया था, जिसकी सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने छात्रों के पक्ष में फैसला देते हुए कॉलेज में हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम में पढ़ाई पूर्व की भांति होने आदेश दिया है।

जैसे ही आदेश की जानकारी छात्र-छात्राओं को लगी, स्टूडेंट्स फूले नहीं समाए. एबीवीपी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने छात्र हित में निर्णय को लेकर खुशियां मनाई।

कॉलेज में एडमिशन होने के बाद स्टूडेंट्स दुविधा में पड़ गए थे, जिसकी वजह से उन्हें आंदोलन और विरोध का रास्ता चुनना पड़ था । उन्होंने बताया कि साइंस कॉलेज में इसलिए एडमिशन लिया है कि यहां कि पढ़ाई बेहतर है। लेकिन, कॉलेज को अंग्रेजी माध्यम बनाने के साथ ही उन्हें कॉलेज छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा था।लेकिन उच्च न्यायालय ने उन्हें राहत दी है।

सबसे पुराने संस्थान के रूप में सरकारी ई राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान कॉलेज मुख्य रूप से एक निजी कॉलेज था। जिसे पहले एसबीआर कॉलेज के नाम जाता था। कॉलेज की स्थापना 1944 में शिव भगवान रामेश्वरदीन ने की थी, ताकि आसपास के होनहार बच्चों को सस्ती उच्च शिक्षा मिल सके।

बाद में 1972 में इसे मध्यप्रदेश सरकार ने अधिग्रहित कर लिया। इस दौरान यहां सभी फैकल्टीज की पढ़ाई होती थी। फिर 1986 में इसे मॉडल कॉलेज का दर्जा दिया गया और स्वाशासी कॉलेज बना दिया गया।

इसके साथ ही यहां दूसरे संकायों को बंद कर सिर्फ साइंस सब्जेक्ट की पढ़ाई होने लगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने 2006 में ‘सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन साइंस’ का दर्जा दिया था और इसका नाम बदलकर गवर्नमेंट ई. राघवेंद्र राव पोस्टग्रेजुएट साइंस कॉलेज कर दिया।

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