मराठी अनिवार्य तो! छत्तीसगढ़ी क्यों नहीं? 12 फरवरी से शुरु होगा पोस्टकार्ड भेजने एवं ज्ञापन सौंपने का अभियान

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छत्तीसगढ़/शुभ संकेत: महाराष्ट्र सरकार ने एक आदेश जारी कर सभी शासकीय एवं अर्धशासकीय कार्यालयों में मराठी भाषा बोलने और इसी भाषा में शासकीय कामकाज करने का नियम लागू कर दिया है।  यह भाषायी अस्मिता के लिए बहुत शानदार एवं अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय कदम है। हम छत्तीसगढ़ शासन से मांग करते हैं, कि यहां भी सभी शासकीय व अर्धशासकीय कार्यालयों में छत्तीसगढ़ी भाषा को अनिवार्य किया जाए।

ऑडियो वीडियो क्लिप सौजन्य : श्री नंदकिशोर शुक्ल जी, बिलासपुर।

इसके लिए बाबू प्यारेलाल गुप्त सृजन पीठ रतनपुर के सचिव श्री ब्रजेश श्रीवास्तव ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि सृजन पीठ, संत रविदास जयंती (माघ पूर्णिमा मेला) 12 फरवरी से जल्दी ही एक अभियान शुरू करेगी और राजभाषा छत्तीसगढ़ी को पूरी तरह लागू करने की मांग करेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री सहित शासन के अन्य प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा एवं पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए एक कार्यसमिति का गठन होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ी भाषा के विद्वानों एवं साहित्यकारों को शामिल किया जाएगा, उसके बाद जन अभियान शुरू होगा। गौरतलब है कि सृजन पीठ ने साल 2025 को छत्तीसगढ़ी कविता वर्ष घोषित किया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ी को सम्मान दिलाने मुहिम शुरू होगी।

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