शुभ संकेत/रायगढ़:-छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव में, RSS के पूर्व प्रचारक और अयोध्या के पूर्व सायं कार्यवाह, 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रतीक जी पर हुए हालिया हमले ने प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह घटना 12 अगस्त 2024 को घटित हुई, जब प्रतीक जी अपने पैतृक घर की देखरेख के लिए लौटे थे। यह मामला सासन प्रशासन की खामियों और उसकी जिम्मेदारियों की पूरी तरह से अनदेखी का उदाहरण बन गया है।
घटना की शुरुआत
प्रतीक जी, जिन्होंने समाज सुधारक के रूप में लखनऊ और अयोध्या में कई साल बिताए, हाल ही में छत्तीसगढ़ के अपने पैतृक घर की देखरेख के लिए लौटे थे। उनका परिवार 30 वर्षों से इस घर में नहीं रह रहा था, और उन्होंने इसे अब सही स्थिति में लाने की कोशिश की। लेकिन उनका यह शांतिपूर्ण प्रयास उनके पड़ोसियों को पसंद नहीं आया, जिनमें बिहार का प्रवासी परिवार शामिल था। यह परिवार गंभीर अपराधों में लिप्त रहा है और उनका इतिहास अपराधों से भरा पड़ा है।
हमला और उत्पीड़न
12 अगस्त को, जब प्रतीक जी अकेले घर पर थे, उनका पड़ोसी परिवार, जिसमें अधिवक्ता सुनील शर्मा और निशा शर्मा शामिल थे, घर में घुस आया। इन लोगों ने प्रतीक जी की मां के साथ अभद्रता की, उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, और उनकी अस्मिता को भंग करने की कोशिश की। इस हमले ने न केवल प्रतीक जी और उनके परिवार को गहरे मानसिक आघात पहुँचाया, बल्कि समाज में भी एक भयंकर असुरक्षा की भावना उत्पन्न की है।
प्रशासन की लापरवाही
सवाल यह है कि जब इस घटना की रिपोर्ट की गई, तब प्रशासन ने क्या कदम उठाए? सच्चाई यह है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मामले को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। आरोपियों पर गैरजमानती धाराओं में केस दर्ज किया गया, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने उचित कानूनी कार्रवाई नहीं की। मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन की यह चुप्पी और निष्क्रियता आश्चर्यजनक है।
प्रशासन ने इस मामले में किसी भी प्रकार की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई नहीं की। यह लापरवाही केवल प्रतीक जी और उनके परिवार के प्रति अन्याय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न भी लगाती है। स्थानीय प्रशासन ने न तो पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान की और न ही दोषियों को सजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए। इसके विपरीत, प्रशासन की ढिलाई और लापरवाही ने दोषियों को और भी अधिक हौसला दिया, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण
यह मामला केवल एक व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि यह सासन प्रशासन की खामियों और उसकी जिम्मेदारियों की पूरी तरह से अनदेखी का प्रतीक है। राजनीतिक नेताओं और समाज सुधारकों ने इस घटना की निंदा की है और प्रशासन की इस निष्क्रियता पर तीखी आलोचना की है। स्थानीय और राज्य स्तर पर कार्यकर्ता और नागरिक अब इस मामले में त्वरित और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष
इस घटना ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ के सासन प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए अपनी प्रभावशीलता और संवेदनशीलता में सुधार करने की आवश्यकता है। प्रतीक जी और उनके परिवार के साथ हुआ यह अत्याचार प्रशासन की बड़ी लापरवाही और उसकी असंवेदनशीलता का परिचायक है। इस मामले में न्याय की प्राप्ति और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे अन्यायपूर्ण घटनाओं को रोका जा सके और समाज में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बहाल किया जा सके।
RSS के पूर्व प्रचारक प्रतीक जी पर हमला: छत्तीसगढ़ में शासन प्रशासन की बेतरतीबी और लापरवाही की पोल खुली
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