भागवत कथा सुनने से ही होता है जीव का कल्याण- पं. श्री कौशलमणी तिवारी, इंदिरा नगर में 21 दिसंबर से बह रही श्रीमद भागवत भक्ति गंगा

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शुभ संकेत/कोरबा/पाली:- शिवनगरी पाली के नया बस स्टैंड पीछे, इंदिरा नगर में 21 दिसंबर गुरुवार से भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ हुआ है। जहां गोरखपुर (गौरेला) से आए कथा वाचक (गौ उपासक) पं. श्री कौशलमणी तिवारी जी देवकी नंदन वासुदेव की महिमा का बखान कर रहे है। अधिवक्ता राजेश राठौर के निवास स्थान में स्वर्गीय पिता श्री भागवत प्रसाद राठौर के पुण्य स्मृति में शुरू हुए श्री लक्ष्मी नारायन महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन कथा वाचक श्री तिवारी जी ने कहा कि संसार में भगवान कृष्ण ही सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करते हैं। भगवान के चरणों में जितना समय बीत जाए उतना अच्छा है। इस संसार में एक- एक पल बहुत कीमती है। जो बीत गया सो बीत गया। इसलिए जीवन को व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहिए। भगवान द्वारा प्रदान किए गए जीवन को भगवान के साथ और उनके सत्संग में ही व्यतीत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत प्रश्न से प्रारंभ होती है और पहला ही प्रश्न है कि कलयुग के प्राणी का कल्याण कैसे होगा। इसमें सतयुग, त्रेता और द्वापर युग की चर्चा ही नहीं की गई है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि बार- बार यही चर्चा क्यों की जाती है, अन्य किसी की क्यों नहीं। इसके कई कारण हैं जैसे अल्प आयु, भाग्यहीन और रोगी। इसलिए इस संसार में जो भगवान का भजन न कर सके, वह सबसे बड़ा भाग्यहीन है। भगवान इस धरती पर बार- बार इसलिए आते हैं ताकि हम कलयुग में उनकी कथाओं का आनंद ले सकें और कथाओं के माध्यम से अपना चित्त शुद्ध कर सकें। व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। इससे जीव का कल्याण होगा। श्रीमद्भागवत कथा एक ऐसी कथा है, जो जीवन के उद्देश्य एवं दिशा को दर्शाती है। जहां भी भागवत कथा होती है, इसे सुनने मात्र से वहां का सम्पूर्ण क्षेत्र दुष्ट प्रवृत्तियों से खत्म होकर सकारात्मक ऊर्जा से सशक्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन और व्यवहार में धारण करें। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का भंडार है और इसे सुनने से अलौकिक ज्ञान की प्राप्ति के साथ मन निर्मल हो जाता है तथा जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। इसलिए श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण का लाभ हर एक इंसान को लेना चाहिए। आयोजक एवं मुख्य यजमान राजेश राठौर, राकेश, रविश ने बताया कि कथा वाचक के मुखारबिंद से संगीतमय श्रीमद भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ महोत्सव में भक्तों को रसपान कराया जा रहा है तथा 28 दिसंबर को पूर्वाहुति, सहस्त्रधारा, तुलसी वर्षा के साथ भंडारे का आयोजन किया गया है। आयोजक राजेश राठौर ने श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में पहुँचकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।

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