अनूपपुर/जैतहरी से


जिले में एक बार फिर कंपनी प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में खुलासा हुआ है कि मौजा वेयर कंपनी द्वारा निजी भूमि पर कथित रूप से अवैध रूप से रेल लाइन का निर्माण कर कब्जा किया गया, जिसके खिलाफ न्यायालय ने स्पष्ट आदेश भी जारी कर दिया है। इसके बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम जैतहरी निवासी भागचंद्र राठौर एवं अन्य की जमीन—जिसमें खसरा नंबर 2403/1/1, 2403/1/2/3 और 2403/1/3/1 शामिल हैं—पर कंपनी द्वारा जबरन मिट्टी डालकर और निर्माण कार्य कर कब्जा कर लिया गया। पीड़ित पक्ष द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई, जिसके बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
*न्यायालय का स्पष्ट आदेश, फिर भी ढिलाई क्यों?*
माननीय न्यायालय प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, अनूपपुर द्वारा दिनांक 23 जनवरी 2026 को पारित आदेश (प्रकरण क्रमांक RCA/59/2025) में कंपनी के अवैध कब्जे को हटाने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद भी जमीनी स्तर पर आदेश का पालन न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
*विधानसभा सदस्य एवं पूर्व मंत्री का हस्तक्षेप, मामला गरमाया*
इस गंभीर मामले को लेकर क्षेत्र के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि माननीय बिसाहुलाल सिंह जी ने कलेक्टर अनूपपुर को पत्र लिखकर न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित कराने और अवैध कब्जा हटाने की मांग की है। उनके पत्र के सामने आने के बाद यह मामला और अधिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश,
*कंपनी पर दबाव की रणनीति का आरोप*
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन न केवल अवैध कब्जा कर रहा है, बल्कि विरोध करने वालों पर दबाव बनाने की कोशिश भी कर रहा है। यह आरोप यदि सही हैं, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
*प्रशासन की अग्निपरीक्षा*
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह न्यायालय के आदेश को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या अवैध कब्जा हटेगा? क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी? या फिर मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
*सवाल:*
जब अदालत का आदेश स्पष्ट है, तो आखिर किसके संरक्षण में कंपनी इतनी बेखौफ है?
यह मामला अब सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि कानून और प्रशासन की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है।


