अनपढ़ समझी गई महिला की आवाज़ पहुँची शासन तक रामकली प्रजापति की लड़ाई ने सैकड़ों श्रमिकों में फिर जागीउम्मीद

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अनुपपुर एम.बी. पावर (म.प्र.) लिमिटेड, लहरपुर परियोजना में कार्यरत 57 कर्मचारियों को वेतन, एरियर, जॉइनिंग लेटर एवं सैलरी स्लिप जैसे वैधानिक अधिकार न मिलने के गंभीर मामले में अब शासन ने संज्ञान ले लिया है।भूमि विस्थापित किसान, कर्मचारी संघ की सदस्य श्रीमती रामकली प्रजापति, जिन्होंने अपने दिवंगत पति स्व. देवलाल प्रजापति एवं अन्य श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष की राह चुनी, उनकी शिकायत पर सहायक श्रम आयुक्त, शहडोल संभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कंपनी प्रबंधन को कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश जारी किए हैं।

सहायक श्रम आयुक्त ने जारी किया आधिकारिक पत्र

सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय, शहडोल द्वारा जारी पत्र दिनांक 18.12.2025 के माध्यम से एम.बी. पावर प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि शिकायत के संबंध में आवश्यक दस्तावेजों सहित 24 दिसंबर 2025 को कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करें। साथ ही श्रम अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि अनावेदक संचालक / प्रबंधक एम बी पावर मध्यप्रदेश लिमि0 लहरपुर को विधिवत नोटिस तामील कराया जाए।

लंबे समय से अनसुनी रही आवाज़

रामकली प्रजापति लगातार कंपनी प्रबंधन से अपने और अन्य कर्मचारियों के अधिकारों की मांग रखती रहीं, लेकिन आरोप है कि कंपनी ने अपनी ऊँची पहुँच, ताकत और उनकी अशिक्षा व पारिवारिक परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए उनकी बातों को अनसुना किया।
रामकली का कहना है कि “हमने कई बार विनम्रता से अपनी बात रखी, लेकिन हमें कमजोर समझकर टाल दिया गया।”

पहले ही दी थी चेतावनी

रामकली प्रजापति ने पहले ही मीडिया के माध्यम से स्पष्ट कर दिया था कि यदि उनकी वैध मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे श्रम अधिकारी एवं श्रम आयुक्त कार्यालय का दरवाज़ा खटखटाने को मजबूर होंगी।
आख़िरकार उन्होंने सहायक श्रम आयुक्त श्री सूर्यकांत सिरवैय्या जी संभाग शहडोल के समक्ष पूरे तथ्य, दस्तावेज़ और पीड़ा रखी। सहायक श्रम आयुक्त ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया और उसी का परिणाम है कि दिनांक 18.12.2025 को आधिकारिक पत्र जारी हो चुका है।

यह सिर्फ एक महिला की लड़ाई नहीं

यह लड़ाई सिर्फ रामकली प्रजापति की नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों श्रमिकों और विस्थापित परिवारों की है, जिनकी आवाज़ समय के साथ दबा दी गई थी।
यह मामला बताता है कि यदि हौसला बुलंद हो तो अनपढ़ समझे जाने वाले व्यक्ति भी व्यवस्था को जवाब देने पर मजबूर कर सकते हैं।

रामकली प्रजापति ने आमजन से अपील करते हुए कहा,

“यह लड़ाई केवल मेरी नहीं है, यह आप सबकी भी है। यदि आज हम चुप रहे तो अन्याय और बढ़ेगा। मैं सभी से अनुरोध करती हूँ कि आगे आएँ और मेरी तथा आपकी इस लड़ाई में बराबर का साथ दें।”

संदेश साफ़ है—
अगर आप पीड़ित हैं, अकेले नहीं हैं।
कानून आज भी आपकी आवाज़ सुनता है।
डर नहीं, हक़ की बात कीजिए।

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