अनूपपुर मध्यप्रदेश
जिला अनूपपुर के जैतहरी क्षेत्र स्थित एम.बी. पावर (म.प्र.) लिमिटेड लहरपुर में कार्यरत श्रमिकों के साथ हो रहे कथित शोषण का मामला अब खुल
कर सामने आया है। यह खुलासा श्रम विभाग की जांच के बाद हुआ, जिसमें कंपनी प्रबंधन की गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रमिकों के हितों को लेकर रमेश प्रजापति एवं रामकली प्रजापति द्वारा लगातार श्रम विभाग में शिकायतें की जा रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर सहायक श्रमायुक्त महोदय द्वारा दिनांक 10 मार्च 2026 को संस्थान में पहुंचकर जांच की गई।
जांच के दौरान यह पाया गया कि कंपनी प्रबंधन, मानव संसाधन प्रमुख आर.के. खटाना सहित अन्य जिम्मेदार शामिल हैं, द्वारा श्रमिकों के साथ व्यापक स्तर पर नियमों की अनदेखी की जा रही थी। प्रमुख अनियमितताएं इस प्रकार सामने आईं—
श्रमिकों को नियमानुसार नियुक्ति पत्र प्रदान नहीं किए गए।
ओवरटाइम से संबंधित रिकॉर्ड संधारित नहीं किया गया।
श्रमिकों को वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप) नहीं दी जा रही थी।
वेतन में एरियर एवं एचआरए का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के अनुसार भुगतान नहीं किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आई टी आई के लगभग 50 श्रमिकों को कुशल श्रेणी के स्थान पर अन्य श्रेणी का वेतन दिया गया, जिससे लाखों रुपये का बकाया बनता है। श्रम विभाग द्वारा लगभग 20 लाख रुपये की बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
श्रम विभाग ने कंपनी प्रबंधन को 06.04.2026 को पत्र जारी कर 10 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत कर बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
अन्यथा नियमानुसार 10 गुना दंडात्मक कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई है।
यह *12 वर्षों के इतिहास में पहली बार हुआ है,* जब श्रमिकों की शिकायत पर इस स्तर की निष्पक्ष जांच हुई और कंपनी प्रबंधन की कार्यप्रणाली खुलकर सामने आई। पहले जहां श्रमिक दर-दर भटकते थे और उन्हें कोई न्याय नहीं मिलता था, वहीं अब इस कार्रवाई से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।
इस पूरे मामले को उजागर कराने एवं उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने में *भूमि विस्थापित किसान कर्मचारी संघ जैतहरी* की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके निरंतर प्रयासों से यह कार्रवाई संभव हो सकी।
श्रमिकों का कहना है यह मामला न केवल श्रमिकों की जीत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि एकजुट होकर आवाज उठाई जाए, तो बड़े से बड़े प्रबंधन की मनमानी को भी उजागर किया जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और श्रमिकों में न्याय की उम्मीद जगी है। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है।


