*अनूपपुर : सहायक श्रम पदाधिकारी जिला अनूपपुर श्री अनुव्रत द्विवेदी, कलेक्टर एवं जिलादंडाधिकारी श्री हर्षल पंचोली की ढिलाई से कर्मचारियों मजदूरों का शोषण जारी, सवालों के घेरे में विभाग*

अनूपपुर।
जिले के श्रमिकों से जुड़ा एक गंभीर मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। मामला मज़दूरों के शोषण और श्रम पदाधिकारी कार्यालय की ढिलाई से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता रमेश प्रजापति, जो लगभग 04 माह से कंपनी में कार्यरत हैं, ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची और सेवा-संबंधी दस्तावेज दिए कार्य कराया जा रहा है। यहां तक कि कंपनी ने समय पर वेतन और वैधानिक सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं कराई।
इस मामले में दिनांक 04 जुलाई 2025 को कार्यालय श्रम पदाधिकारी अनूपपुर में शिकायत दिया गया था जिस पर 07 अगस्त 2025 को कार्यालय श्रम पदाधिकारी द्वारा नियोजक मोजर बेयर पावर मध्य प्रदेश लिमि0 लहरपुर को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नियुक्ति पत्र, वेतन विवरण और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें। इसके बावजूद नियोजक/प्रबंधक ने न केवल आदेश की अवहेलना की बल्कि सुनवाई के लिए स्वयं फोन पर तिथि तय कर वादा करने के बाद भी उपस्थित नहीं हुए।
जब पीड़ित श्रमिक ने इसकी शिकायत कर स्मरण पत्र प्रस्तुत किया तो उम्मीद थी कि विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से श्रम पदाधिकारी कार्यालय ने कार्रवाई में लगातार विलंब किया, जिससे सवाल उठने लगे हैं कि आखिरकार विभाग किसके दबाव में काम कर रहा है।
🔴 मजदूरों का दर्द, विभाग की चुप्पी
04 माहों से कार्यरत होने के बावजूद न नियुक्ति पत्र, न सेवा शर्तें।
समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के मुकाबले कम वेतन और भेदभाव।
श्रम विभाग के आदेशों की बार-बार खुली अवहेलना।
श्रम पदाधिकारी की कार्रवाई में देरी ने प्रभावित खातेदार के के सदस्य की पीड़ा और बढ़ाई।
🔴 उठे बड़े सवाल
1. जब श्रमिक का शोषण साफ़ तौर पर दस्तावेजों से सिद्ध है, तो कार्रवाई क्यों टाली जा रही है?
2. क्या श्रम पदाधिकारी और उनके वरिष्ठ अधिकारी कंपनी पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं?
3. क्या विभागीय ढिलाई, नियोजक और अधिकारियों की मिलीभगत का परिणाम है?
🔴 कानूनी विशेषज्ञों एवं सामाजिक कार्यकर्ता की राय
*प्रभावित परिवार के सदस्य, किसान बबलू राठौर जी सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रम कानून विशेषज्ञों का कहना है कि* यदि कोई नियोजक श्रम पदाधिकारी के आदेशों की अवहेलना करता है तो उसके विरुद्ध सीधे अभियोजन, जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और यहां तक कि कारावास तक की कार्यवाही हो सकती है। लेकिन विभाग द्वारा जानबूझकर देरी करना मजदूरों के अधिकारों के हनन और विधिक प्रक्रिया से खिलवाड़ के समान है।
🔴 मजदूर संगठनों की चेतावनी
स्थानीय मजदूर संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन तेज़ किया जाएगा और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध भी जवाबदेही तय करने की मांग उठेगी।
—
निष्कर्ष :
यह मामला न केवल श्रमिक अधिकारों के उल्लंघन का है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी बड़ा उदाहरण है। सवाल यह है कि आखिर कब तक प्रभावित खातेदार के परिवार के सदस्य कर्मचारी अपने हक के लिए भटकते रहेंगे और विभागीय अधिकारी जिम्मेदारी से बचते रहेंगे? यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला और भी बड़ा बन सकता है और श्रम विभाग की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग सकता है।


