अमरकंटक में आस्था भी ‘टैक्स’ के घेरे में!😤
₹100 की रसीद से शुरू होता है शुल्क का
सिलसिला… फिर जगह-जगह अलग शुल्क! मां नर्मदा की उद्गम भूमि अमरकंटक में श्रद्धालु आस्था और सुकून की तलाश में पहुंचते हैं, लेकिन पर्यटकों का कहना है कि यहां घूमने से ज्यादा हर पड़ाव पर रसीद कटवाने का सिलसिला परेशान कर रहा है।
पार्किंग के नाम पर शुल्क, अलग-अलग व्यू-प्वाइंट पर शुल्क और अन्य दर्शनीय स्थलों पर भी राशि—एक परिवार के लिए दिनभर घूमने का खर्च आसानी से सैकड़ों रुपये तक पहुंच जाता है।
सवाल शुल्क लेने पर नहीं, सवाल उस शुल्क के बदले मिलने वाली सुविधाओं पर है। रविवार और छुट्टियों में भीड़ बढ़ती है तो पार्किंग के लिए परेशानी, वाहनों का जाम और व्यू-प्वाइंट पर भीड़—ऐसे में श्रद्धालु पूछ रहे हैं— जब हर जगह रसीद कट रही है, तो फिर व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों?
पर्यटक अनुशील सिन्हा का कहना है कि शुल्क लिया जाना गलत नहीं, लेकिन उसके बदले पार्किंग, सफाई, सुरक्षा और यातायात जैसी मूलभूत सुविधाएं भी दिखाई देनी चाहिए। वहीं पर्यटक सुनील का कहना है कि अमरकंटक आने वाले श्रद्धालु यहां आस्था और प्रकृति का आनंद लेने आते हैं। जगह-जगह शुल्क के साथ यदि सुविधाएं भी बेहतर हों तो पर्यटकों का अनुभव और अच्छा हो सकता है।
जनता का सवाल सीधा है—रसीद के साथ सुविधा कब?
मां नर्मदा की उद्गम भूमि की पहचान रसीदों से नहीं, श्रद्धालुओं की संतुष्टि और बेहतर व्यवस्था से होनी चाहिए।
शुल्क लीजिए, लेकिन सुविधा भी दीजिए।
व्यवस्था कीजिए, ताकि अमरकंटक से श्रद्धालु सवाल नहीं… अच्छी यादें लेकर लौटें।
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