जिला ब्यूरोश प्रजापति की खास रिपोर्ट
जैतहरी। कोल माइंस कर्मचारी के सेवानिवृत्ति फंड की राशि बैंक खाते में आते ही लाखों रुपये की कथित निकासी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कर्मचारी के बेटे ने पिता की चेकबुक, पासबुक और एटीएम अपने कब्जे में लेकर पहले एटीएम से राशि निकाली और बाद में चेक पर कथित रूप से जाली हस्ताक्षर कर पिता के खाते से करीब 30 लाख रुपये निकाल लिए। मामले में पीड़ित कर्मचारी द्वारा थाना जैतहरी में लिखित शिकायत देने के बावजूद पुलिस द्वारा आवेदन लेने और कार्रवाई करने से कथित तौर पर इनकार किए जाने का भी आरोप है।
जानकारी के अनुसार संबंधित कोल माइंस कर्मचारी खुली खदान धनपुरी में कार्यरत थे और कुछ माह पूर्व ही सेवानिवृत्त हुए हैं। सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने अपने सहकर्मियों के लिए घर पर ही एक कार्यक्रम आयोजित किया था। कार्यक्रम में कर्मचारियों के साथ उनके पुत्र, पुत्री एवं बहू भी शामिल हुए थे। इसी दौरान अवसर पाकर कर्मचारी का पुत्र कथित रूप से उनकी पासबुक, एटीएम और चेकबुक लेकर जैतहरी स्थित अपने घर चला गया।
कुछ दिनों बाद जब कर्मचारी को दस्तावेजों के गायब होने की जानकारी हुई तो उन्होंने कोतवाली अनूपपुर में इसकी सूचना दी। बताया जा रहा है कि पुलिस की मौजूदगी में संबंधित पुत्र को बुलाकर पासबुक और चेकबुक वापस दिलाई गई, जबकि एटीएम बाद में देने की बात कही गई।
5 अगस्त को खाते में आई रिटायरमेंट की राशि
बताया गया कि 5 अगस्त 2026 को कर्मचारी के बैंक खाते में रिटायरमेंट फंड की राशि जमा हुई। आरोप है कि उसी दिन खाते से एटीएम के माध्यम से 20-20 हजार रुपये के ट्रांजेक्शन किए गए। इसके अगले ही दिन कर्मचारी के खाते से करीब 30 लाख रुपये की राशि अलग-अलग चेकों के माध्यम से निकाले जाने की जानकारी सामने आई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन चेकों पर उनके जाली हस्ताक्षर किए गए तथा राशि उनके पुत्र, पुत्री और बहू के नाम से निकाली गई।
थाने में सुबह से रात तक बैठे रहे कर्मचारी
राशि निकाले जाने की जानकारी मिलते ही संबंधित कर्मचारी जैतहरी थाने पहुंचे और पूरे मामले की लिखित सूचना पुलिस को देने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देने के बावजूद उनका आवेदन लेने से इनकार कर दिया गया और कार्रवाई करने में असमर्थता जताई गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार वे सुबह करीब 11 बजे से रात 9 बजे तक जैतहरी थाने में कार्रवाई की उम्मीद में बैठे रहे। इस दौरान पुलिस द्वारा संबंधित पुत्र को थाने बुलाया गया और उससे बातचीत करने के बाद उसे वापस भेज दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद भी उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई और न ही उन्हें किसी प्रकार की प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई गई।
बैंक रिकॉर्ड और चेक से खुल सकता है पूरा मामला
मामले में खाते से निकाली गई रकम, एटीएम ट्रांजेक्शन, चेक की प्रतियां, हस्ताक्षर का मिलान और बैंक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। यदि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में जालसाजी, धोखाधड़ी और विश्वासघात सहित संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई का प्रश्न उठता है।
हालांकि, खबर लिखे जाने तक पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। मामले में पुलिस की जांच और बैंक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खाते से रकम किस माध्यम से और किन परिस्थितियों में निकाली गई।


