जिला ब्यूरो महेश प्रजापति की खास रिपोर्ट
जैतहरी। नगर परिषद जैतहरी क्षेत्र में शासकीय भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण, उस पर बहुमंजिला भवन निर्माण और विद्युत कनेक्शन दिए जाने का मामला सामने आया है। मामले को लेकर नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) भूपेंद्र सिंह की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शासकीय भूमि के संबंध में शिकायत किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक प्रभावी वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार मध्यप्रदेश शासन की भूमि को नियमानुसार निजी व्यक्तियों के बीच सामान्य खरीदी-बिक्री अथवा अन्य निजी हस्तांतरण के माध्यम से हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद जैतहरी क्षेत्र में शासकीय भूमि के कथित अवैध क्रय-विक्रय के बाद उस पर बहुमंजिला भवन का निर्माण कर दिया गया। आरोप है कि भवन निर्माण के बाद उसे किराए पर देकर शासकीय भूमि से निजी स्तर पर आर्थिक लाभ भी अर्जित किया जा रहा है।
नोटिस के बावजूद पूरा हो गया भवन निर्माण
शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित भवन को लेकर नगर परिषद द्वारा समय-समय पर नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा और देखते ही देखते बहुमंजिला भवन का निर्माण पूरा हो गया। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि निर्माण वास्तव में नियम विरुद्ध था तो लगातार नोटिस जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
बिजली कनेक्शन को लेकर भी गंभीर सवाल
मामले में विद्युत कनेक्शन को लेकर भी शिकायत की गई है। आरोप है कि निर्माणाधीन/निर्मित भवन के लिए नगर परिषद की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसके बाद भवन में कथित रूप से पांच विद्युत कनेक्शन प्रदान कर दिए गए।
शिकायतकर्ता का दावा है कि बाद में उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत किए जाने पर कथित अवैध विद्युत कनेक्शनों को काटने के निर्देश जारी किए गए। इसके बावजूद आरोप है कि भवन में विद्युत आपूर्ति जारी है और पांचों कनेक्शन अभी भी संचालित हो रहे हैं। यदि यह तथ्य सही है तो यह संबंधित विभागीय आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शासकीय संपत्ति के संरक्षण पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण और उसके व्यावसायिक उपयोग से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। साथ ही सवाल उठाया गया है कि संबंधित अधिकारियों को शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व एवं हस्तांतरण दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही भवन निर्माण की स्वीकृति, नगर परिषद द्वारा जारी नोटिस एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र, विद्युत कनेक्शनों के दस्तावेज तथा भवन के व्यावसायिक उपयोग की भी जांच की जाए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
मामले में यह भी जांच का विषय है कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय है तो उसका कथित हस्तांतरण किस आधार पर हुआ, भवन निर्माण की अनुमति किस नियम के तहत दी गई और विद्युत कनेक्शन किन दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए।
शिकायतकर्ता ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
- हालांकि, सीएमओ भूपेंद्र सिंह, नगर परिषद जैतहरी तथा संबंधित विद्युत विभाग के अधिकारियों का पक्ष इस संबंध में प्राप्त नहीं हो सका है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना आवश्यक है।


