4माह से काम कर रहा कर्मचारी आज भी “कागज़ों पर ग़ैर मौजूद”! – कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप, श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

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अनूपपुर।
जिले के जैतहरी क्षेत्र में कंपनी मोजर बेयर पावर लिमिटेड पर संगीन आरोप लगे हैं कि उसने लगभग 04 माहों से पसीना बहा रहे चयनित परिवार के सदस्य व कर्मचारी रमेश प्रजापति पिता रामप्रसाद प्रजापति माता गणेशिया बाई (खाता क्रमांक 101, ग्राम गुवारी, पोस्ट अमगवां, जिला अनूपपुर) को अब तक न तो नियुक्ति पत्र दिया, न वेतन पर्ची, न ही कानूनी भत्ते।

यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि सैकड़ों प्रभावित परिवारों और कामगारों की अनदेखी और शोषण का ज्वलंत उदाहरण बन चुका है।

✦ कर्मचारी के गंभीर आरोप

1. लगभर 04 से शोषण – बिना नियुक्ति पत्र और ऑफर लेटर के कार्य कराया गया।

2. भेदभावपूर्ण व्यवहार – समान कार्य करने के बावजूद अन्य कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन और कोई भत्ते नहीं दिए गए।

3. कानून की खुलेआम धज्जियाँ –ईएसआई, अलाउंस जैसे मूल अधिकार तक नहीं मिले।

4. प्रशासनिक आदेश की अवहेलना – श्रम विभाग ने 07 अगस्त 2025 को नियुक्ति पत्र और वेतन विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, परंतु कंपनी ने अब तक आदेश का पालन नहीं किया।

 

✦ श्रम विभाग की चुप्पी पर सवाल

श्रमिक रमेश प्रजापति का कहना है –
“मैंने अपनी समस्या श्रम पदाधिकारी, कलेक्टर सहित सभी उच्च अधिकारियों तक पहुँचाई, परंतु कंपनी प्रबंधन के प्रभाव और विभागीय उदासीनता के कारण आज भी मेरा और मेरे जैसे अन्य परिवारों का हक़ अधर में लटका हुआ है।”

स्थानीय श्रमिक संगठनों ने श्रम विभाग पर आरोप लगाया है कि वह कंपनी प्रबंधन की मनमानी पर आंखें मूंदे बैठा है और श्रमिकों की पुकार को दबाया जा रहा है।

✦ अब टूटा सब्र का बांध

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो मामला सीधे श्रम न्यायालय और उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

उन्होंने साफ कहा है कि वे “कंपनी एचआर” और कंपनी के जिम्मेदार प्रबंधकों की बहानों की राजनीति और अधिकारियों की चुप्पी सहन नहीं करेंगे।

 

✦ जनता और मीडिया से अपील

पीड़ित कर्मचारी ने स्थानीय जनता, संगठनों और मीडिया से गुहार लगाई है कि वे इस अन्याय को उजागर करें ताकि कंपनी प्रबंधन पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके और प्रभावित खातेदार के परिवार के सदस्य को उनका हक़ दिलाया जा सके।

✍️ निष्कर्ष

यह मामला केवल एक परिवार का नहीं बल्कि श्रमिक अधिकारों और कानून की सरेआम धज्जियाँ उड़ाने का है। यदि श्रम विभाग ने तुरंत कठोर कार्रवाई नहीं की, तो यह उनके लापरवाह रवैये का काला धब्बा बन जाएगा। अब ज़रूरत है ठोस कार्यवाही की – न कि बहानों और जांच के नाम पर समय बर्बाद करने की।

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