जिला ब्यूरो महेश प्रजापति का रिपोर्ट बीड पंचायत में लाखों रूपयों की पीसीसी सड़क चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट
जैतहरी जनपद पंचायत के अंतर्गत बीड पंचायत इन दिनों सुर्खियों बटोर रही है निर्माण कार्यों को लेकर जहां पर लाखों की पीसीसी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है जिसमें मानक पैमाने का उपयोग न करते हुए निर्माण कार्य को किया जा रहा है गुणवत्ता विहीन मटेरियल को उपयोग में लाया जा रहा है निर्माण एंजेसी यानि कि पंचायत है लेकिन यह भी बात सही है कि काम तो पंचायत समिति करवा रही है जिसमें पंच ,सरपंच, पंच और रोजगार सहायक तथा मेट होते हैं लेकिन निर्माण कार्यों से जिम्मेदार लापता रहते हैं चलिए चलते हैं कहा कहा पर क्या निर्माण कार्य हो रहा है बीड पंचायत में और क्यों बना जन चर्चा का विषय
लाखों रूपयों का पीसीसी सड़क निर्माण कार्य की कमान नौसीखिया लोगों के हाथों में जिम्मेदार लापता रहते हैं बंजर टोला में सड़क बन रही है जहां जब जमीनी स्तर पर देखा गया तो बिना बेस के ही सड़क ढलाई चालू है मतलब जमीन पर सीधा और वो भी 3इंच उंचाई में ऊपर फीनिशिगं भी इस तरह से आप देखकर कहेंगे कि पीसीसी सड़क तो बीड पंचायत में बन रही है यही है असली सड़क जिस पर यादि ट्रैक्टर या ट्रक चढ़ जाए या चल जाए तो सड़क ही टूटकर बिखर जाए इतनी पतली सड़क पहली बार दिखाई दिया जिसे कैमरे में कैद किया गया कि इस अजूबे निर्माण कार्य को दिखाया जा सके की सड़क ऐसी बननी चहिए, वर टोला में तो 20 फुट लंबाई और 10 फुट सड़क ढलाई की तेज धूप में पीसीसी सड़क की उपर की परत सूख नहीं पायी मवेशीयो के चलने से ताजी सड़क की पोल खुल गई कि किस तरह घटिया क्वॉलिटी की सीमेंट उपयोग में लाई गई साथ ही निर्माण स्थल के किनारे मिली मिट्टी युक्त 40 एम एम की गिट्टी से मिलाकर सड़क निर्माण कार्य को किया गया है पीसीसी सड़क के ऊपर गुजर नाले के रेत में सीमेंट मिलाकर सड़क की छपाई कर दी जाती है फिर चलते हैं नकटी जलाशय में वहां पनघट का निर्माण कार्य चल रहा है मुख्यमंत्री अधोसंरचना के तहत लेकिन वहां पर भी निर्माण कार्य से लेकर गुणवत्ता विहीन मटेरियल का उपयोग में ला कर निर्माण किया जा रहा मजबूती और मानक पैमाने के तहत कोई कार्य नहीं भ्रष्टाचार कि कहानी में कितने ही अहम किरदारों की भूमिका नजर आने लगी और बीड पंचायत में एक से एक जिननाथ निकलकर आने लगे सब अपने अपने विकास रथ या आत्म निर्भर भारत का सपना लेकर आगे बढ़ने के कतार पर चल रहे थे
*पैमाने के अभाव में निर्माण कार्य।*
जिम्मेदार उपयंत्री लापता निर्माण स्थल से मनमाने रूप से चल रहा था कार्य
*नाली का अभाव*
पीसीसी सड़क निर्माण के किनारे हल्की नाली का निर्माण किया जाता है जिससे सड़क का पानी नाली के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है सड़क की मजबूती बनी रहती है लेकिन पैसों का बंदर बांट करने के चक्कर में नाली निर्माण नहीं करवाया गया
और पूछे जाने पर कहते हैं कि स्टीमेट में नही था या फिर जनता के टैक्स के रूपयों का बंदरबांट की जुगाड में लगे हैं, सरपंच , उपसरपंच,पंच और रोजगार सहायक जबकि पुरानी सड़कों के किनारे नाली साथ में बनी हुई है ।
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सड़क निर्माण पैमाना में पहले सड़क की मिट्टी को बराबर करके रोलर चलाने चाहिए जिसके कंप्रेशर से मिट्टी बैठ जानी चाहिए फिर 3 इंच बेस डालनी चाहिए उसे भी बराबर करके रोलर के माध्यम से बराबर करनी चाहिए थी और बाद में 4 इच बेस से 4इंच टोटल 8 इंच का रोड बनना चाहिए था लेकिन चार-पांच इंच में ही बना चुके से 10 एम् एम् गिट्टी सीमेंट की मात्रा 2 तथा रेता की मात्रा 1/4का से से निर्माण किया गया है
होनी चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नहीं यहां तक पीसीसी सड़क ढलाई के समय बाईब्रेटर मशीन का उपयोग करना चाहिए ताकि स्लारी नीचे तक बैठ सके और मजबूत बन सके लेकिन इन सब पैमाने के विपरीत सड़क का निर्माण किया जा रहा था ,साथ मे नाली का अभाव का होना ।
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क्या कहते हैं पंचायत के मुखिया*
देखिए निर्माण कार्य हो रहा है कोई कमी नहीं है मैं ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करता हूं मैंने पंचों को और रोजगार सहायक नरेंद्र दि्वेदी को कार्य सौंप दिया हूं वो जैसा चाहे सड़क बनवाए क्यों कि यह लोग कहते हैं कि सरपंच हर काम में हस्तक्षेप करता है, देखिए मटेरियल बचाकर काम कर रहे हैं क्योंकि मैं चाहता हूं कि और भी काम हो जाए बचे मटेरियल से ।
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सरपंच धन सिंह बीड पंचायत*
क्या कहते हैं बंजर टोला पंच अमृता सिंह देखिए सड़क बहुत बढ़िया बन रही है आज तक ऐसी सड़क किसी ने नहीं बनाया जैसे कि हमारे सरपंच धन सिंह और रोजगार सहायक नरेंद्र दि्वेदी जी के सहयोग से बन रहा है जब गुणवत्ता और सड़क कि मानक पैमाने पर सवाल पर कहती हैं कि मुझे कुछ नहीं पता, मेरे पति जानते हैं मैं कुछ नहीं जानती
*क्या कहते हैं अधिकारी*
मैं अभी बाहर हूं जांच करने मैं स्वंय जाऊंगा उसके बाद ही कुछ बता पाऊंगा
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के के रैकवार जनपद सीईओ जैतहरी*
*क्या कहते हैं उपयंत्री*
फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा गया
संध्या शुक्ला उपयंत्री बीड पंचायत
अब आप समझ सकते हैं कि जिसके देख रेख में काम को करना है वो खुद छुट्टी पर हैं,तो फिर क्या कहना।
कुल मिलाकर बीड पंचायत में भ्रष्टाचार का खो खो खेल चल रहा है गांव में ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास मिला न हो लेकिन रोजगार सहायक नरेंद्र दि्वेदी जन चर्चा में बने हुए हैं कारण है उनका बंगला कम से कम करोड़ों के आसामी बताए जाते हैं इनके परिवारिक पृष्ठभूमि भूमि कोई दमदार नहीं निकली पिता जी पंडिताई करते थे यह नौकरी करने से पहले इनके आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी ग्रामीणो ने बताया नाम लेने कि शर्त पर कि बेचारे गरीब थे लेकिन जब से रोजगार सहायक बने नरेंद्र दि्वेदी तब से इनके सामने बड़े बड़े अधिकारी पानी भरते नजर आते हैं नौ हजार की सैलरी पाने वाला रोजगार सहायक नरेंद्र दि्वेदी करोड़ों कि बंगला ,भाइयों के नाम पर जमीन ,घर में महंगी गाड़ियों यह सब भ्रष्टाचार की कहानी को उजागर करता है जिस तरह से बीड पंचायत में निर्माण कार्य को करवाया जा रहा है पैमानों के विपरीत ठीक उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम आदमी दिन रात खून पसीना बहाकर भी उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचा जा सकता है जितने ऊंचाई पर रोजगार सहायक नरेंद्र दि्वेदी है इससे साफ भ्रष्टाचार की कहानी साबित होती अब खबर प्रकाशित होने के बाद यादि प्रशासन नरेंद्र दि्वेदी रोजगार सहायक की संपत्ति और पंचायत में फैले भ्रष्टाचार कि जांच की करती है तो आवश्यक रूप से इनका खेल सामने आएगा और नहीं तो ठंडे बस्ते में चला जाएगा


