अमरकंटक: योग का संदेश, लेकिन जमीन पर ‘भोग’ का खेल जारी* *शराबबंदी के वादे और मैकल पार्क की अनियमितताओं पर उठे सवाल, जनता बोली – जवाब दो*

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*अमरकंटक, विशेष संपादकीय सलाहकार नत्थू लालराठौर* पवित्र नगरी अमरकंटक में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भव्य आयोजन हुआ। शासन-प्रशासन के आला अधिकारी, जनप्रतिनिधि और कर्मचारी एक साथ योग करते दिखे। स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश दिया गया। लेकिन योग के इस भव्य आयोजन के पीछे की हकीकत पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि अमरकंटक में घोषणाएं कुछ और हैं, हकीकत कुछ और।

*शराबबंदी सिर्फ कागजों में?*
अमरकंटक को ‘शराब मुक्त’ बनाने की घोषणा कई बार हो चुकी है। पवित्र नगरी के धार्मिक महत्व को देखते हुए यहाँ शराब बिक्री पर रोक की मांग लंबे समय से उठ रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी इसे लेकर आदेश जारी किए गए। मगर स्थानीय लोगों का कहना है कि धरातल पर स्थिति जस की तस है। शहर में आज भी धड़ल्ले से शराब की बिक्री जारी है। बोर्ड पर “शराब उपलब्ध है” लिखे होने के फोटो वायरल हो रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि जब योग दिवस जैसे कार्यक्रम में पूरा शासन-प्रशासन एकजुट हो सकता है, तो शराबबंदी के अपने ही आदेश पर अमल क्यों नहीं करा पा रहा? क्या पवित्र नगरी की पवित्रता सिर्फ पोस्टर और घोषणाओं तक सीमित रह जाएगी?

*मैकल पार्क: नियम ताक पर, राजस्व को नुकसान*
विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा मैकल पार्क है। आरोप है कि पार्क का संचालन नियम-कानून को ताक पर रखकर एक तथाकथित व्यक्ति को सौंप दिया गया है। न तो विधिवत आवंटन प्रक्रिया अपनाई गई, न ही अनुबंध की शर्तों का पालन हो रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि पार्क के संचालन का किराया भी सरकारी खजाने में नहीं आ रहा। इससे राज्य सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जब योग से शरीर स्वस्थ होता है, तो व्यवस्था पारदर्शी क्यों नहीं हो सकती? मैकल पार्क के आवंटन, अनुबंध और किराया भुगतान की पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?

*जनता की मांगें*
इस पूरे मामले को लेकर जनता में रोष है। लोगों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
1. अमरकंटक में शराब बिक्री पर तुरंत और प्रभावी रोक लगाई जाए।
2. मैकल पार्क के आवंटन और वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
3. दोषी अधिकारियों और व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

*सीएम के आदेश बेअसर?*
मामला सिर्फ अमरकंटक तक सीमित नहीं है। पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री के आदेशों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अवैध वसूली बंद करो, अतिक्रमण हटाओ, भ्रष्टाचार रोकों, जनता की सुनो, कानून का पालन करो जैसे आदेश तो जारी हुए, लेकिन जमीन पर अवैध वसूली जारी है, अतिक्रमण यथावत है और भ्रष्टाचार चरम पर बताया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि जब मुख्यमंत्री के आदेश कागजों तक सीमित रह जाएं, तो इसे सरकार नहीं लाचारी कहा जाएगा।

*असली पहचान क्या हो?*
अमरकंटक की पहचान नर्मदा के उद्गम स्थल और योग-आध्यात्म की नगरी के रूप में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अमरकंटक को ‘योग’ चाहिए, न कि ‘भोग और धोखाधड़ी’। स्वस्थ समाज और पारदर्शी व्यवस्था ही अमरकंटक की सच्ची पहचान बन सकती है। अब देखना यह है कि योग दिवस के मंच से स्वास्थ्य का संदेश देने वाला प्रशासन, व्यवस्था को स्वस्थ बनाने के लिए कब कदम उठाता है। जनता जवाब मांग रही है। कार्रवाई का इंतजार है। जिला चीप ब्यूरो महेश प्रजापति

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