अनूपपुर जिले के जैतहरी और आस-पास के वन क्षेत्रों में हाथियों का आना-जाना पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गया है। वन विभाग के शोध और हाथियों के मूवमेंट पैटर्न के अनुसार, ये हाथी मुख्य रूप से निम्नलिखित रास्तों और क्षेत्रों से इस इलाके में प्रवेश कर रहे हैं:
छत्तीसगढ़ के जंगलों से (मुख्य मार्ग):
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। ये हाथी मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के मरवाही, मनेंद्रगढ़ और गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान (Sanjay-Dubri/Guru Ghasidas corridor) के जंगलों से होते हुए अनूपपुर जिले की सीमा में दाखिल होते हैं। छत्तीसगढ़ में जंगलों के विखंडन और पानी-भोजन की तलाश में हाथी अक्सर इस कॉरिडोर का उपयोग करते हैं।
अमरकंटक और डिंडोरी वन परिक्षेत्र से:
एक बार जब हाथी छत्तीसगढ़ की सीमा पार कर अनूपपुर में प्रवेश करते हैं, तो वे अमरकंटक की पहाड़ियों और डिंडोरी जिले के जंगलों (जैसे शहडोल संभाग के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्रों) के रास्तों से होते हुए जैतहरी के मैदानी और ग्रामीण इलाकों तक पहुंच जाते हैं।
संजय टाइगर रिजर्व (सीधी/शहडोल) कॉरिडोर:
कुछ दल उत्तर-पूर्वी दिशा से संजय दुबरी टाइगर रिजर्व और शहडोल के जंगलों से होते हुए भी इस पूरे बेल्ट में मूवमेंट करते हैं। अनूपपुर और जैतहरी का इलाका इनके प्राकृतिक आवागमन मार्ग (Wildlife Corridor) का हिस्सा बनता जा रहा है।
हाथियों के इस तरफ आने के मुख्य कारण:
भोजन और पानी की तलाश: जैतहरी और आस-पास के गांवों में धान, मक्का और गन्ने की फसलें हाथियों को आकर्षित करती हैं। इसके अलावा, महुआ के सीजन में महुआ की महक हाथियों को जंगलों से निकालकर बस्तियों की तरफ खींच लाती है।
पारंपरिक रास्तों की बहाली: हाथी अपने पुराने रास्तों (Corridors) को कभी नहीं भूलते। कई दशकों बाद हाथी अपने पुराने रास्तों को तलाशते हुए छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश के इन इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं।
वन विभाग लगातार इन हाथियों की ट्रैकिंग (निगरानी) करता है और ग्रामीणों को सतर्क रहने, हाथियों को न उकसाने तथा रात के समय जंगलों की तरफ न जाने की सलाह देता है।


