एमबी पावर प्लांट की मनमानी पर हाईकोर्ट का हथौड़ा” – कर्मचारियों की लड़ाई रंग लाई, HR प्रमुख आर के खटाना की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

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“एमबी पावर प्लांट की मनमानी पर हाईकोर्ट का हथौड़ा” – कर्मचारियों की लड़ाई रंग लाई, HR प्रमुख आर के खटाना की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

अनूपपुर जिले के एमबी पावर प्लांट में लंबे समय से चल रही वेतन विसंगतियों और कर्मचारियों के बकाया भुगतान के मामले ने आखिरकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अब माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश के बाद कंपनी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कर्मचारी स्वर्गीय देवलाल प्रजापति की धर्म पत्नी कानूनी उत्तराधिकारी श्री मति रामकली प्रजापति द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि कंपनी प्रबंधन द्वारा मनमानी वेतन नीति अपनाते हुए कर्मचारियों के वैधानिक बकाया का भुगतान नहीं किया जा रहा था। मामले की सुनवाई के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि संबंधित प्राधिकारी कर्मचारी के आवेदन पर निर्णय लें और कर्मचारी बकाया वेतन का हकदार पाया जाता है तो 30 दिनों के भीतर भुगतान किया जाए।

मामले में यह भी सामने आ रहा है कि कंपनी प्रबंधन ने स्वयं जिन शर्तों और नियमों को लिखित रूप में लागू किया था, उन्हीं का पालन नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हुआ और इसी कारण वेतन संबंधी विवाद पैदा हुआ।

सूत्रों के अनुसार कंपनी के मानव संसाधन प्रमुख आर.के. खटाना की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी कथित मनमानी और तानाशाही रवैये के कारण ही यह स्थिति उत्पन्न हुई। कर्मचारियों का कहना है कि नियमों को इस तरह से लागू किया गया कि कई कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित होना पड़ा।

बताया जा रहा है कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि आवेदिका को अपने अधिकारों के लिए अंततः माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि जिस तरह से नियमों की बारीकियों का उपयोग कर अधिकार रोके गए, उसने उन्हें न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

गांव-घर में एक कहावत कही जाती है – “जैसी करनी वैसी भरनी”। कर्मचारियों का मानना है कि अब न्यायालय के आदेश के बाद सच्चाई सामने आ रही है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

फिलहाल यह फैसला कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें एमबी पावर प्लांट प्रबंधन पर टिकी हैं कि वह न्यायालय के आदेश का पालन समयसीमा के भीतर करता है या नहीं। यदि आदेश की अवहेलना होती है तो प्रबंधन के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी संभव है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि कंपनी प्रबंधन न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए कर्मचारियों को उनका हक देता है या नहीं।

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