जिला ब्यूरो महेश प्रजापति
जैतहरी के ग्राम चोई में सोमवती अमावस्या पर महिलाओं ने रखा पति की दीर्घायु हेतु व्रत*
*अनूपपुर, जैतहरी*: जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रिया के ग्राम चोई में सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत रखा और पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना की। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करना था।
*व्रत और पूजन की विधि*
सोमवार 15 जून 2026 को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या के दिन ग्राम की महिलाओं ने ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान किया। स्नान के बाद नए वस्त्र और सोलह श्रृंगार धारण कर महिलाओं ने पीपल वृक्ष के पास एकत्र होकर व्रत का संकल्प लिया।
पूजा के दौरान महिलाओं ने पीपल के पेड़ की जड़ में दूध, गंगाजल, काले तिल अर्पित किए। इसके बाद पीपल पर कलावा बांधकर 108 बार परिक्रमा की गई। मान्यता है कि पीपल में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों देवों का वास होता है। परिक्रमा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया गया।
*सोमवती कथा का श्रवण*
पूजा के बाद गांव की बुजुर्ग महिला द्वारा सोमवती अमावस्या की व्रत कथा सुनाई गई। कथा के अनुसार एक साहूकार की बहू ने यह व्रत रखकर अपने ससुराल को संकट से बचाया था। तभी से सुहागिनें यह व्रत करती आ रही हैं। कथा सुनने के बाद महिलाओं ने बांस के पंखे से पीपल देव और अपने पति को हवा देने की परंपरा निभाई।
*स्थानीय परंपरा और महत्व*
अनूपपुर जिले का जैतहरी क्षेत्र गोंड और बैगा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। यहां वट-पीपल की पूजा को “प्रकृति पूजा” से भी जोड़कर देखा जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि सोमवती अमावस्या पर पीपल पूजा करने से पितृ दोष समाप्त होता है, घर से रोग-दोष दूर होते हैं और पति पर आने वाला संकट टल जाता है।
व्रत रखने वाली महिला निर्मला सिंह ने बताया कि “हमारी दादी-नानी के समय से यह परंपरा चली आ रही है। इस व्रत से मन को शांति मिलती है और परिवार में एकता बनी रहती है।”
*दान-पुण्य का विधान*
व्रत के समापन पर महिलाओं ने ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को पंखा, घड़ा, चावल, दाल, वस्त्र और दक्षिणा का दान किया। शास्त्रों में सोमवती अमावस्या पर दान का विशेष महत्व बताया गया है।


