इंसानों को नहीं जंगली जानवरों की चिंता,छीरापटपर मे एक्सीडेंट से घायल मादा जंगली सूअर की मौत,मृत्यु के 15 घंटा बाद हो सका दाह संस्कार*

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अनूपपुर06 जून//शासकीय पदो में आने बाद इंसान इतना व्यस्त हो जा रहा है कि विभिन्न तरह की घटनाओं में घायल या मृत पालतू मवेशी या जंगली जानवरों के हितों की चिंता नहीं रहती है जिसका सबसे बड़ा उदाहरण शनिवार की शाम जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर शहडोल अनूपपुर -अमरकंटक मुख्य मार्ग के मध्य छीरापटपर में एक मादा जंगली सुअर जो अपने अन्य साथियों के साथ मुख्य मार्ग को पार कर रही थी तभी अचानक तेज गति से चलने वाला अज्ञात वाहन की ठोकर से गंभीर रूप से घायल हो गई जिसे ऑटो वाहन से वनचौकी जमुडी लाकर रखा गया ना हीं पशु चिकित्सक ना हीं पशु चिकित्सा सहायक सूचना के कई घंटे बाद उपचार हेतु पहुंच सके जिस कारण तड़पते हुए मादा जंगली सुअर की देर रात मौत हो गई वही मृत्यु के 15 घंटे तक कहीं डॉक्टर तो कहीं वन अधिकारी कहीं अन्य के कारणो से निरंतर 15 घंटे बीत जाने पर अंततः मृत जंगली सुअर के शव का दाह संस्कार हो सका ऐसी घटना पहली बार नहीं कई बार घटित हो चुकी है।

शनिवार की देर शाम जिला मुख्यालय अनूपपुर के वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल जो 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर शंभूधारा सरोवर अमरकंटक में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में सम्मिलित होने बाद वापस अनूपपुर आ रहे थे तभी अमरकंटक शहडोल एवं अनूपपुर मुख्य मार्ग के मध्य छीरापटपर में अज्ञात वाहन की ठोकर से जंगली मादा सुअर गंभीर रूप घायल स्थिति मे बीच मार्ग में तड़पते पड़ी रही है जो स्वयं घसीटते हुए मार्ग के किनारे जाकर दर्द से कराह रही थी जिसे देखते हुए तत्काल वन अधिकारियों कर्मचारियों को श्री अग्रवाल द्वारा सूचित किए जाने पर वन कर्मचारी सुरक्षाश्रमिकों के साथ स्थल पर पहुंचकर गंभीर रूप से घायल मादा जंगली सूअर को उपचार हेतु आटो वाहन से वनचौकी जमुडी ला कर रखा इस बीच कई घंटे तक पशु विभाग के जिम्मेदार पशु चिकित्सा अधिकारी,पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी से गंभीर रूप से घायल वन्यप्राणी के उपचार हेतु आने का आग्रह किये जाने के कई घंटे बाद तक कही साधन ना होने कही बाहर होने,कई वार फोन नहीं उठाने का बात करते करते कई घंटे बीत गए निरंतर तड़पते हुए जंगली मादा सुआर ने रात 10:30 बजे दम तोड़ दिया वहीं रविवार को मृत मादा जंगली सुअर का शव का पी,एम,एवं दाह संस्कार की कार्यवाही में भी पूर्व की अन्य घटनाओं की तरह इस बार भी लापरवाही बरतते हुए 15 घंटे बाद वन अधिकारी,पशु चिकित्सा,राजस्व विभाग के अधिकारियों के पहुंचने पर पी,एम,एवं अन्य कार्यवाही करते हुए दाह संस्कार कराया गया।
शासकीय सेवा में आने के बाद इंसान अपने दायित्व का इतश्री करते हुए समस्याओं का त्वरित समाधान करने की जगह नए-नए बहाने खोज कर समस्या के निराकरण की जगह और समस्या पैदा करने का कार्य करते हैं जिस कारण वन्यजीव तड़प-तड़प कर मृत हो जाते हैं।
वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल ने बताया कि ऐसी घटना अनूपपुर जिले में कई बार देखी गई की विभिन्न तरह कि घटनाओं में घायल या मृत पालतू मवेशियो,वन्यजीवो के उपचार एवं शव परीक्षण में अनावश्यकया जानबूझ कर विलंब किए जाने से पशु मालिक,वनविभाग के अधिकारी/कर्मचारी एवं अन्य परेशान रहते हैं।
श्री अग्रवाल ने शासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों से मनुष्यों की तरह पालतू एवं वन्यजीवों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाए जाने की अपील की है।

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