अनूपपुर जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। शौचालयों से लेकर वार्डों और गलियारों तक गंदगी का अंबार लगा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की साफ-सफाई और रखरखाव पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जब मीडिया ने इस मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किए तो वे जवाब देने से बचते नजर आए। देखिए यह विशेष रिपोर्ट।
वीओ-1 :
जिला अस्पताल अनूपपुर में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को बीमारी के साथ-साथ गंदगी की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। अस्पताल के कई हिस्सों में कचरा फैला हुआ दिखाई दिया, जबकि शौचालयों की स्थिति बेहद खराब मिली। दुर्गंध और गंदगी के कारण मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
वीओ-2 :
अस्पताल प्रबंधन की ओर से साफ-सफाई के लिए नियमित व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, लेकिन अस्पताल परिसर की तस्वीरें इन दावों की पोल खोलती नजर आती हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब साफ-सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो फिर अस्पताल की हालत इतनी बदहाल क्यों है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
वीओ-3 :
मामले को लेकर जब मीडिया ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आर. एस. परस्ते से सवाल पूछे तो वे पहले कैमरे के सामने आने और जवाब देने से बचते रहे। बाद में मीडिया के सवालों से घिरने पर उन्होंने गोलमोल जवाब दिए और अस्पताल में मौजूद कमियों पर स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बचते नजर आए। अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवालों पर भी वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
वीओ-4 :
वहीं अस्पताल से जुड़ी जानकारी लेने के दौरान सीएमएचओ अल्का तिवारी भी मीडिया से दूरी बनाती नजर आईं। उन्होंने व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोलमोल जवाब दिए और कैमरे से दूरी बनाए रखी। इससे यह सवाल और गहरा गया कि आखिर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है और सुधार की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।
वीओ-5 :
मरीजों और उनके परिजनों ने जिला प्रशासन से अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में इस तरह की लापरवाही न केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।
आउट्रो :
अब बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और गंदगी के अंबार पर स्वास्थ्य विभाग कब तक चुप्पी साधे रहेगा। क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या फिर मरीजों को इसी तरह अव्यवस्थाओं के बीच इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। जिला अस्पताल की यह तस्वीरें व्यवस्था सुधार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
बाइट :
बबलू राठौर
समाजसेवी / स्थानीय नागरिक
बाइट :
मरीज / परिजन
बाइट :
डॉ. आर. एस. परस्ते
सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय अनूपपुर


