*: जैतहरी महाविद्यालय में विकास की नई लहर: प्राचार्य के द्वारा सभी
शिक्षण संस्थान की आत्मा उसका शैक्षणिक वातावरण और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण होता है। जैतहरी महाविद्यालय, जो क्षेत्र के हजारों युवाओं के सपनों को आकार देने का केंद्र रहा है, आज एक नए बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इस परिवर्तन के सूत्रधार हैं महाविद्यालय के प्राचार्य श्री रमेश कुमार। उनके मार्गदर्शन में पिछले कुछ समय से महाविद्यालय में कई रचनात्मक और विकासात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सीधा असर छात्रों की उपस्थिति, उनके उत्साह और समग्र व्यक्तित्व विकास पर दिखाई दे रहा है।
*प्राचार्य द्वारा कराए जा रहे प्रमुख कार्य एवं पहल*
*1. शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार*
प्राचार्य रमेश सिंह वाटे ने सबसे अधिक जोर शिक्षण की गुणवत्ता पर दिया है। इसके तहत नियमित कक्षाओं की मॉनिटरिंग शुरू की गई है। अनुपस्थित शिक्षकों के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। महाविद्यालय में स्मार्ट क्लास की सुविधा शुरू कराई गई है जिससे छात्र डिजिटल माध्यम से भी विषयों को आसानी से समझ पा रहे हैं। कमजोर छात्रों के लिए विशेष रेमेडियल क्लास चलाई जा रही हैं। साथ ही यूजीसी नेट, पीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क मार्गदर्शन शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है।
*2. आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण*
छात्रों की मूलभूत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय परिसर में कई कार्य कराए गए हैं। शुद्ध पेयजल के लिए नए आरओ प्लांट लगाए गए हैं। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का जीर्णोद्धार कराया गया है। पुस्तकालय को अपडेट किया गया है और उसमें नई पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ प्रतियोगी पुस्तकें और समाचार पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कक्षाओं में टूटे फर्नीचर को बदला गया है और लाइट-पंखों की व्यवस्था दुरुस्त की गई है। कैंपस में वाई-फाई की सुविधा पर भी काम चल रहा है।
*3. सह-शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा*
पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्राचार्य महोदय विशेष प्रयास कर रहे हैं। महाविद्यालय में नियमित रूप से वाद-विवाद, निबंध, क्विज और कविता पाठ जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। वार्षिक खेलकूद समारोह को बड़े स्तर पर मनाया गया जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। एनएसएस और एनसीसी इकाइयों को सक्रिय कर सामाजिक जागरूकता रैलियां, स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। इससे छात्रों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।
*4. छात्र कल्याण और करियर मार्गदर्शन*
प्राचार्य रमेश सिंह वाटे ने छात्र सहायता केंद्र को और मजबूत किया है। यहां छात्रों को छात्रवृत्ति फॉर्म भरने, दस्तावेज सत्यापन और शासन की अन्य योजनाओं की जानकारी दी जाती है। महाविद्यालय में करियर काउंसलिंग सेल का गठन किया गया है। इस सेल के माध्यम से समय-समय पर विशेषज्ञों को बुलाकर छात्रों को करियर विकल्प, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के अवसरों की जानकारी दी जाती है। कुछ स्थानीय कंपनियों से बात कर कैंपस प्लेसमेंट की शुरुआत पर भी विचार किया जा रहा है।
*5. अनुशासन और स्वच्छ परिसर*
महाविद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के लिए एक प्रॉक्टोरियल बोर्ड बनाया गया है। कक्षाओं में समय पर आना, आई-कार्ड अनिवार्य करना और रैगिंग मुक्त कैंपस जैसे कदम उठाए गए हैं। “स्वच्छ भारत अभियान” के तहत पूरे परिसर में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दीवारों पर प्रेरणादायक स्लोगन लिखवाए गए हैं और गार्डन को भी व्यवस्थित किया गया है।
*छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया*
इन सभी कार्यों के परिणामस्वरूप महाविद्यालय में सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है। छात्रों की उपस्थिति पहले की तुलना में बढ़ी है। कक्षाओं में पढ़ाई का माहौल बेहतर हुआ है। बी.ए. तृतीय वर्ष के छात्र अजय सिंह का कहना है, “पहले लाइब्रेरी में किताबें नहीं मिलती थीं, अब नई किताबें आ गई हैं और पढ़ने के लिए शांत जगह भी है।” छात्रा प्रियंका यादव ने बताया, “सर ने खेल और कल्चरल प्रोग्राम शुरू कराए हैं, जिससे हमें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है।” अभिभावकों ने भी प्राचार्य के इन प्रयासों की सराहना की है।
*निष्कर्ष*
प्राचार्य रमेश सिंह वाटे की दूरदर्शिता और कर्मठता से जैतहरी महाविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाला केंद्र न रहकर ज्ञान, संस्कार और कौशल विकास का एक आदर्श संस्थान बनने की ओर अग्रसर है। उनके द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्य न केवल छात्रों को बेहतर सुविधाएं दे रहे हैं बल्कि उनमें एक नया आत्मविश्वास और उत्साह भी भर रहे हैं। यदि इसी प्रकार विकास की गति बनी रही तो निश्चित ही यह महाविद्यालय आने वाले समय में क्षेत्र का अग्रणी शैक्षणिक संस्थान बनेगा।
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