जिला ब्यूरो महेश प्रजापति की रिपोर्ट

अनूपपुर। जैतहरी थाना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला एक नाबालिग बालिका के अपहरण, दुष्कर्म और पुनः अपहरण से जुड़ा है, जिसमें पीड़ित परिवार ने सीधे पुलिस महानिरीक्षक (IG) शाहडोल को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि थाना पुलिस की कथित लापरवाही और संदिग्ध भूमिका के कारण आरोपियों के हौसले इतने बढ़ गए कि बालिका को दोबारा अपने साथ ले जाने की घटना हो गई।
शिकायत के अनुसार, बालिका के बरामद होने के बाद भी पुलिस ने आरोपों की गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई नहीं की। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मामले को दबाने, समझौते का दबाव बनाने तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई में ढिलाई बरती। परिवार का कहना है कि यदि पहली बार ही कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होती, तो दूसरी घटना शायद कभी नहीं होती।
शिकायत में संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच तथा विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। मामले ने पूरे पुलिस तंत्र की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पहला मामला नहीं है जब जैतहरी थाना चर्चा में आया हो। स्थानीय लोगों के बीच पहले भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। वहीं हाल ही में एक अन्य छेड़छाड़ के मामले में भी पीड़िता को न्याय के लिए सीधे IG कार्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा था, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई हुई। इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या आम नागरिक को न्याय पाने के लिए हर बार जिला स्तर से ऊपर जाना पड़ेगा?
अब सबकी निगाहें पुलिस मुख्यालय और IG शाहडोल की कार्रवाई पर हैं। बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में संबंधित पुलिस अधिकारियों की लापरवाही या अनुचित भूमिका सामने आती है, तो क्या उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई होगी, या फिर जिम्मेदारी तय किए बिना मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा?
नाबालिग से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में हर देरी और हर चूक केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि पीड़िता की सुरक्षा और न्याय पर सीधा प्रभाव डालती है। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पूरे समाज की अपेक्षा है।


