शुभ संकेत/कोरबा:- छत्तीसगढ़ को शिक्षा का गढ़ बनाने के दावों के बीच ऊर्जा धानी कोरबा जिले से एक ऐसी जमीनी हकीकत सामने आई है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोलती है। बाकी मोगरा के बाकी बस्ती में स्थित स्कूल इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। यहाँ शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ चुकी है और बच्चों का भविष्य अंधकार में लटक गया है।
स्कूल में कमरों की इस कदर कमी है कि 8वीं कक्षा के विद्यार्थियों को बैठाने के लिए प्रधान पाठक (हेडमास्टर) को अपना दफ्तर छोड़ना पड़ा है। वर्तमान में प्रधान पाठक के ऑफिस को ही आठवीं कक्षा बना दिया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
सच्चाई बयां करती स्कूल की बदहाली:
इमारत नहीं, हादसों को न्योता: स्कूल का पूरा भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। दीवारों में दरारें और जर्जर छत के नीचे बच्चे बैठने को मजबूर हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
शिक्षकों की भारी कमी: स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था ही नहीं है। पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है, जिसके कारण बच्चे दिनभर स्कूल परिसर और बाहर खुले में घूमने को मजबूर हैं।
प्यास बुझाने को तरसते बच्चे: भीषण गर्मी और उमस के इस दौर में भी स्कूल में पीने के साफ पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। बच्चे पानी के लिए तरस रहे हैं।
शौचालय का अभाव: स्कूल में टॉयलेट (शौचालय) की व्यवस्था न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को उठानी पड़ रही है। स्वच्छता के दावों के बीच यह स्थिति बेहद शर्मनाक है।
“जब स्कूल में न कमरा है, न टॉयलेट, न पानी और न ही पढ़ाने के लिए शिक्षक, तो बच्चे स्कूल जाकर क्या करेंगे? प्रशासन मौन बैठा है और हमारे बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।”
उच्च अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की मांग:
बाकी बस्ती के ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने कोरबा जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि:
तत्काल स्कूल के लिए नए कमरों और जर्जर भवन की मरम्मत की व्यवस्था की जाए।
स्कूल में नियमित शिक्षकों की पदस्थापना की जाए।
पीने के पानी और टॉयलेट की सुविधा तुरंत बहाल की जाए।
यदि समय रहते शिक्षा विभाग ने सुध नहीं ली, तो स्थानीय ग्रामीण और छात्र उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।



