जिला ब्यूरो महेश प्रजापति का खास रिपोर्ट
जैतहरी। हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड जैतहरी पर गरीब एवं विस्थापित किसानों तथा मजदूरों के आर्थिक शोषण का गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी में लंबे समय से कार्यरत विस्थापित श्रमिकों को न तो नियमित रूप से पेमेंट स्लिप उपलब्ध कराई जा रही है और न ही शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के अनुरूप भुगतान किया जा रहा है। इसके साथ ही कर्मचारियों के पीएफ को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार यह मामला पिछले करीब 10 से 12 वर्षों से चला आ रहा है। आरोप है कि कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ कंपनी में कार्यरत विभिन्न ठेकेदारों के माध्यम से भी विस्थापित एवं गरीब मजदूरों का कथित रूप से शोषण किया जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें उनके श्रम के अनुरूप वैधानिक भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है।
श्रम विभाग में शिकायत के बाद जांच
मामले को लेकर श्रमिकों की ओर से लेबर आयुक्त, शहडोल के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर जांच किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार जांच में कंपनी एवं उसके अधीन कार्यरत ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का पूर्ण भुगतान नहीं किए जाने तथा अन्य श्रम संबंधी अनियमितताओं के तथ्य सामने आए।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जांच के बाद श्रम विभाग की ओर से निर्धारित समय-सीमा में संपूर्ण बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। समय-सीमा में भुगतान नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई एवं अतिरिक्त राशि की वसूली का प्रावधान भी बताया गया है।
पीएफ को लेकर भी उठे सवाल
श्रमिकों ने भविष्य निधि (पीएफ) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उनके वेतन से पीएफ के नाम पर राशि काटे जाने के बावजूद उसके जमा होने और खाते में वास्तविक रूप से दर्ज होने को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। श्रमिकों ने मांग की है कि प्रत्येक कर्मचारी के पीएफ खाते की स्वतंत्र रूप से जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कंपनी एवं ठेकेदारों द्वारा नियमानुसार अंशदान जमा किया गया है या नहीं।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से शिकायतें सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कंपनी एवं ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। विस्थापित किसानों और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के गरीब मजदूरों का कहना है कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
निष्पक्ष जांच और बकाया भुगतान की मांग
श्रमिकों ने मांग की है कि कंपनी एवं उसके अधीन कार्यरत सभी ठेकेदारों के श्रमिकों का पिछले वर्षों का वेतन, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ एवं अन्य वैधानिक देयकों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। साथ ही पेमेंट स्लिप, बैंक भुगतान और पीएफ रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
मामले में हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड के प्रबंधन और संबंधित श्रम अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने के बाद उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना आवश्यक है। जांच में सामने आए दस्तावेज और श्रम विभाग के आदेश इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।


