शुभ संकेत/बिलासपुर:-आमतौर पर हम घरों और भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के बारे में सुनते आए हैं, लेकिन अब धरती के घटते जलस्तर को सुधारने के लिए छत्तीसगढ़ में ‘वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर’ तकनीक पर तेजी से काम शुरू हो गया है। राजनांदगांव में इस अनोखे प्रयोग की सफलता के बाद अब न्यायधानी बिलासपुर में भी इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। शहर के अलग-अलग जोनों में ऐसे स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां पानी का बड़ा जमाव होता है। इस मुहिम को गति देने के लिए शनिवार को नगर निगम आयुक्त ने सभी जोन कमिश्नरों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली और काम को जल्द पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।

बिलासपुर शहर को आने वाले दिनों में जल संकट से बचाने और ग्राउंड वाटर लेवल को मेंटेन करने के लिए नगर निगम एक बड़ा प्रोजेक्ट हाथ में ले रहा है। यह प्रोजेक्ट है ‘वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर’ का। प्रदेश में इसका पहला और सफल प्रयोग राजनांदगांव में किया जा चुका है, और अब इसी तर्ज पर बिलासपुर के विभिन्न जोनों में रिचार्ज स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं।इसके लिए शहर के उन बड़े मैदानों, खाली जमीनों और ढलान वाले हिस्सों का चयन किया गया है, जहां बारिश का लाखों लीटर पानी हर साल जमा होता है और बहकर बर्बाद हो जाता है।
इस मुहिम की सबसे खास बात यह है कि इसमें जनभागीदारी भी देखने को मिल रही है। शहर में कुल 100 रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाए जाने हैं, जिनमें से 50 स्ट्रक्चर ‘क्रेडाई’ के सहयोग से और 50 स्ट्रक्चर ‘ठेकेदार संघ’ के सहयोग से तैयार किए जा रहे हैं।निगम ने इसके लिए साइंस मैदान, बहतरई मैदान, स्मृति वन और प्रमुख खेल मैदानों जैसे बड़े स्थानों को शॉर्टलिस्ट किया है।

इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए शनिवार को निगम आयुक्त ने सभी जोन कमिश्नरों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में साफ निर्देश दिए गए हैं कि मानसून की दस्तक से पहले सभी चिन्हित स्थानों पर तेजी से काम शुरू किया जाए, ताकि इस बार बारिश की एक-एक बूंद को सहेज कर सीधे धरती के गर्भ तक पहुंचाया जा सके।माना जा रहा है कि इन 100 रिचार्ज स्ट्रक्चर्स के बनने के बाद शहर के उन इलाकों में बोरवेल और कुओं का जलस्तर काफी सुधर जाएगा, जो गर्मी के दिनों में पूरी तरह सूख जाते हैं। बहरहाल, क्रेडाई और ठेकेदार संघ के साथ मिलकर शुरू की गई निगम की यह कंक्रीट पहल आने वाले समय में बिलासपुर के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है।


