जेएमएस कंपनी में ये वो वर्कर्स है जो अपनी जमीन जेएमएस



कंपनी को दे चुके हैं और वर्तमान में कंपनी के अंदर काम कर
रहे हैं। पिछले तीन माह से ये कर्मचारी कंपनी के ठेकेदारों की
तानाशाही से परेशान है कि लगातार कंपनी के उच्च
अधिकारियों और जिला प्रशासन राजस्व प्रशासन और पुलिस
प्रशासन से अपने हक मांगने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे
हैं वहीं अपने हक के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े
जनप्रतिनिधियों से भी मिलकर समाधान पाने का प्रयास किया
सत्ता पक्ष और विपक्ष से मिलकर ज्ञापन भी सौपा लेकिन अब
तक कोई समाधान नहीं मिला है। सबसे दुख की बात यह है
कि अपनी जमीन देने के बाद अब कंपनी की तानाशाही और
ठेकेदारों की मनमानी झेलने को विवश है और किसी प्रकार
का न्याय जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन इनके साथ नहीं
कर रहा है अब कभी भी आपके यहां कंपनी आए तो जमीन
देने से पहले इस चीज को जरूर सोचें कि जमीन लेने के बाद
वह आपसे किस तरह का बर्ताव करेगी और आपके शोषण
करने के बाद आपका सहयोग कौन करेगा। फिलहाल कंपनी
के ठेकेदार मजदूरों के पेमेंट से हिस्सा लेते हैं, अगर ठेकेदार
को पेमेंट से हिस्सा नहीं दिया जाता तो उनका कार्य से निकाल
दिया जाता है और साथ ही साथ कल 20 दिन का माह में
कार्य दिया जाता है अब सोचिए कि 20 दिन का कार्य करने के
बाद लगभग 5 से 8 दिन का पैसा वापस ठेकेदार द्वारा ले
लिया जा रहा है अब जमीन देने के बाद वहां के लोग कैसे जिए
और मजदूरी भी कर रहे हैं तो उसे जीवन यापन कैसे होगा।
फिलहाल इन मजदूरों की सुनवाई कहीं नहीं हो पा रही है
लगातार जनप्रतिनिधि उनके साथ खड़े हैं लेकिन जिला
प्रशासन की बेरुखी के कारण और कंपनी की तानाशाही के
कारण इन मजदूरों को तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।


