जैतहरी
कर्नाटक राज्य में हुए अनूपपुर जिला के पांच श्रमिकों की दर्दनाक मौत पर सीटू जिला समिति अनूपपुर ने प्रतिक्रिया देते हुए मध्यप्रदेश सरकार के कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।
सीटू नेता कामरेड जुगुल किशोर राठौर ने मध्यप्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन के कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मनरेगा में अंधाधुंध मशीनीकरण मज़दूरी भुगतान में लेट लतीफी एवं अंधाधुंध भ्रष्टाचार के कारण मजदूर पलायन करने को मजबूर हैं। कामरेड राठौर ने कहा कि अनूपपुर जिला प्राकृतिक संसाधनों से भरा-पूरा होने के बाद भी सरकार के ग़लत कार्यशैली के कारण जिला वासियों को लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिला में कोयला उद्योग, पावर प्लांट मौजूद हैं लेकिन अनूपपुर जिला के बेरोजगारों को लाभ नहीं मिल पा रहा है जिसके कारण जिला के बेरोजगार रोजगार के तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर हैं। इन प्रवासी मजदूरों की दर्द को कोई समझने जानने के कोशिश नहीं की जा रही है। कामरेड जुगुल राठौर ने बताया कि प्रदेश के बाहर काम कर रहे प्रवासी मजदूरो का शोषक ठेकेदार द्वारा मज़दूरी हड़प लेने की शिकायत आए दिन आते रहते हैं जिसका हमारे युनियन सीटू के द्वारा लगातार प्रयास कर भुगतान करवाए जाने में सफल रहे हैं । उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में कर्नाटक राज्य के कोलार जिला में जिला अनूपपुर के पोड़ी निवासी दिनेश सिंह गोड़ पिता हरिहर सिंह गोड़ का पत्थर के धसकने से दोनों पांव में गम्भीर चोट आया था जिसका ठेकेदार द्वारा इलाज नहीं करवाया जा रहा था। सीटू के हश्ताक्षेप से श्रमिक का पैंसठ लाख रुपए का इलाज करवाया गया और वर्कमेन कम्पनसेशन एक्ट के तहत एक करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।
कामरेड जुगुल राठौर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मध्यप्रदेश सरकार से मांग किया है कि मनरेगा को मनरेगा के मंशानुरूप चलाएं जाने प्रभावी कदम उठाया जाय एवं 100 दिन की कार्य को बढ़ाकर कम से कम 200 दिन का रोजगार की गारंटी दिया जाय, भुगतान सप्ताह या पन्द्रह दिन में किया जाना सुनिश्चित किया जाए एवं कम से कम छः सौ रुपए प्रति दिन की मजदूरी निर्धारित तथा जिला के उद्योग में सबसे पहले जिला वासियों को लिया जाने सख्त नियम बनाए जाएं।
जैतहरी, सरकार के कुप्रबंधन एवं ग़लत नीतियों के कारण बढ़ रही पलायन की स्थिति – सीटू।
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